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590 करोड़ बैंक घोटाला: CBI की जांच तेज, दो IAS अधिकारियों से लंबी पूछताछ

20 May 2026 Fact Recorder

Haryana Desk: Central Bureau of Investigation ने हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के IDFC FIRST Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े कथित बैंक घोटाले की जांच तेज कर दी है। मंगलवार को एजेंसी ने दो आईएएस अधिकारियों से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में आए एक अधिकारी की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है।

जांच एजेंसियों को बैंक कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के बीच कथित लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल चैट, व्हाट्सऐप संदेश और अन्य दस्तावेजों में वित्तीय सौदों के संकेत मिलने की बात सामने आई है।

सीबीआई अब तक पांच आईएएस अधिकारियों और एक अन्य अधिकारी से पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान दो अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। ये अधिकारी पंचायत विभाग और Haryana Power Generation Corporation Limited में विभिन्न पदों पर कार्यरत रह चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, आठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति मिलने के बाद अब दो और अधिकारियों के खिलाफ धारा 17-ए के तहत मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। इनमें एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और एक एचसीएस रैंक अधिकारी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब जांच एजेंसी ने संदिग्ध अधिकारियों के डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच शुरू की। जब्त मोबाइल फोन से डिलीटेड डेटा, व्हाट्सऐप चैट और एन्क्रिप्टेड कॉल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। जांच में कथित तौर पर सरकारी फंड को चुनिंदा बैंकों में जमा कराने के बदले बड़े वित्तीय सौदों के संकेत मिले हैं।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित घोटाले की रकम हवाला नेटवर्क या बेनामी संपत्तियों के जरिए कहीं निवेश तो नहीं की गई। इसके अलावा कुछ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी एजेंसियों के हाथ लगी हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।

मामले की जांच तेज होने के बाद हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आईएएस अधिकारियों के खिलाफ धारा 17-ए के तहत जांच की अनुमति दी गई है।

Nayab Singh Saini सरकार ने पहले इस मामले की जांच एसीबी को सौंपी थी, जिसे बाद में सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।