14 May 2026 Fact Recorder
National Desk: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। हाल ही में पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद विपक्षी दल लगातार परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच तमिलनाडु की नई सरकार ने भी NEET का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इसे समाप्त करने की मांग की है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि मेडिकल कोर्सों में दाखिले के लिए NEET आधारित व्यवस्था खत्म कर राज्यों को 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा प्रणाली ग्रामीण, सरकारी स्कूलों और क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों के साथ अन्याय करती है।
मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि NEET की विश्वसनीयता पहले भी सवालों के घेरे में रही है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में भी पेपर लीक का मामला सामने आया था, जिसकी जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी। इसके बावजूद दो साल के भीतर फिर ऐसी घटना होना परीक्षा प्रणाली की खामियों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु शुरू से NEET का विरोध करता आया है क्योंकि यह परीक्षा शहरी और अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को अधिक लाभ पहुंचाती है। राज्य सरकार का दावा है कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कई प्रतिभाशाली छात्र इस व्यवस्था में पीछे छूट जाते हैं।
CM विजय ने मांग दोहराई कि MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों पर दाखिला 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दिया जाए। उनका मानना है कि इससे छात्रों के निरंतर शैक्षणिक प्रदर्शन को महत्व मिलेगा, न कि केवल एक परीक्षा के परिणाम को।
गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार पहले भी NEET से छूट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है। राज्य विधानसभा ने इसके लिए एक विधेयक भी पारित किया था, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिलने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
तमिलनाडु में पहले मेडिकल प्रवेश 12वीं के अंकों के आधार पर होता था। हालांकि 2017 में केंद्र सरकार द्वारा NEET अनिवार्य किए जाने के बाद राज्य को भी इस व्यवस्था को लागू करना पड़ा।













