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ग्लोबल शेयर मार्केट की दौड़ में भारत को चुनौती, ताइवान और साउथ कोरिया तेजी से बढ़े आगे

06 May 2026 Fact Recorder

Business Desk:  एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी के दम पर Taiwan और South Korea के शेयर बाजार तेजी से दुनिया के बड़े इक्विटी मार्केट्स में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। वहीं भारतीय शेयर बाजार पर बढ़े हुए वैल्यूएशन, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और धीमी ग्रोथ का दबाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में ग्लोबल मार्केट रैंकिंग में भारत की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

भारत के करीब पहुंचा ताइवान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताइवान का कुल मार्केट कैप अब लगभग 4.6 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है, जो भारत के करीब 4.9 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप से केवल 6 प्रतिशत कम है। वहीं साउथ कोरिया का मार्केट कैप करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।

साल 2026 में अब तक ताइवान के शेयर बाजार में करीब 40 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। केवल शुरुआती चार महीनों में वहां की कंपनियों की वैल्यू में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

AI और चिप सेक्टर बना सबसे बड़ी ताकत

ताइवान की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर की कंपनियां हैं। Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC)ने इस उछाल में अहम भूमिका निभाई है। AI हार्डवेयर की वैश्विक मांग बढ़ने से कंपनी को बड़ा फायदा मिला है।

इसके अलावा MediaTek, Hon Hai Precision Industry (Foxconn), ASE Technology Holding, Delta Electronics और Quanta Computer जैसी कंपनियों के शेयरों में भी मजबूत तेजी देखने को मिली है।

साउथ कोरिया में भी टेक शेयरों की धूम

South Korea के शेयर बाजार में भी टेक्नोलॉजी सेक्टर की वजह से बड़ी तेजी आई है। वहां का कोस्पी इंडेक्स लगातार मजबूत हुआ है। Samsung Electronics औरSK hynix जैसी मेमोरी चिप कंपनियां इस रैली की अगुवाई कर रही हैं।

भारतीय बाजार पर दबाव क्यों?

दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार में सितंबर 2024 के बाद से उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। 2025 में भारतीय कंपनियों का कुल मार्केट कैप केवल 2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि 2026 में अब तक इसमें करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हैं:

  • शेयरों का ऊंचा वैल्यूएशन
  • कंपनियों की धीमी प्रॉफिट ग्रोथ
  • विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
  • AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की सीमित मौजूदगी
  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव

अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है, जिसका असर भारतीय बाजार की धारणा पर पड़ा है।

क्या भारत पिछड़ सकता है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं, लेकिन अगर एआई और हाई-टेक सेक्टर में निवेश और उत्पादन तेजी से नहीं बढ़ा, तो ताइवान और साउथ कोरिया जैसे बाजार ग्लोबल रैंकिंग में भारत को पीछे छोड़ सकते हैं।