4 मई 2026 Fact Recorder
Business Desk: सोने की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। जब कीमतें अपने उच्चतम स्तर से करीब 18% तक टूट जाएं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निवेश जारी रखें या बाहर निकल जाएं। ऐसे ही हालात का सामना कई निवेशक कर रहे हैं, जिन्होंने ऊंचे स्तर पर सोने में पैसा लगाया था।
जनवरी 2026 में जहां सोना एमसीएक्स पर करीब ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,595 प्रति औंस तक पहुंच गया था, वहीं अप्रैल के अंत तक यह गिरकर लगभग ₹1,49,502 और $4,589 प्रति औंस रह गया। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्या खत्म हो गया है सोने का दौर?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की लंबी अवधि की तेजी अभी भी बरकरार है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं—
- वैश्विक स्तर पर डॉलर पर निर्भरता कम होना (डी-डॉलराइजेशन)
- केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद
- बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव
- कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ती महंगाई
ये सभी कारक सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प बनाए रखते हैं।
निवेश की सही रणनीति क्या हो?
बाजार की अस्थिरता को देखते हुए विशेषज्ञ कुछ अहम सुझाव देते हैं—
- एकमुश्त निवेश के बजाय SIP के जरिए Gold ETF या डिजिटल गोल्ड में निवेश करें
- कुल पोर्टफोलियो का केवल 10–15% हिस्सा ही सोने में रखें
- सोने को शॉर्ट-टर्म ट्रेड नहीं, बल्कि 5–10 साल का निवेश मानें
गिरावट में घबराएं नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट को बाजार की सामान्य करेक्शन के रूप में देखा जाना चाहिए। रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता सोने की कीमतों को आगे भी सहारा दे सकती है।
कुछ अनुमानों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में सोना फिर से मजबूत प्रदर्शन कर सकता है और 2027 तक कीमतें नए उच्च स्तर छू सकती हैं।
निष्कर्ष
अगर आपने ऊंचे स्तर पर निवेश किया है, तो घबराकर बाहर निकलना जरूरी नहीं है। बल्कि यह समय समझदारी से अपनी रणनीति को संतुलित करने का है। लंबी अवधि के नजरिए से देखा जाए तो सोना अब भी पोर्टफोलियो में एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प बना हुआ है।













