खाड़ी संघर्ष का असर: हिमाचल में सड़क निर्माण पर संकट, तारकोल के दाम दोगुने

21 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Himachal Desk: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से तारकोल (बिटुमेन) की भारी कमी हो गई है। रिफाइनरियों में उत्पादन लगभग 50 फीसदी घट गया है, जिससे सड़कों की टारिंग का काम रुकने लगा है।

44 हजार से 88 हजार रुपये प्रति टन पहुंची कीमत

कुछ सप्ताह पहले तक तारकोल करीब 44,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन मिल रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर लगभग 88,000 रुपये प्रति टन हो गई है। कई जगह बिटुमेन की दर ₹43 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.60 प्रति किलो तक पहुंच गई है।

हिमाचल में सड़क टारिंग पर लगा ब्रेक

तारकोल की कमी और बढ़ती लागत के कारण लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और अन्य एजेंसियों की सड़क परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। कई ठेकेदार नए टेंडर डालने से बच रहे हैं, जबकि जिन ठेकेदारों ने पहले ही भुगतान कर दिया है, उन्हें भी समय पर सामग्री नहीं मिल रही। सप्लाई मिलने में 10 से 15 दिन तक लग रहे हैं।

मानसून से पहले का समय सबसे अहम

अप्रैल से जून तक का समय हिमाचल में सड़क टारिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। जुलाई-अगस्त में मानसून शुरू होने के बाद सड़क निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में मौजूदा संकट के कारण हजारों किलोमीटर सड़क निर्माण और मरम्मत का काम अटक गया है। इससे पर्यटन और सेब सीजन पर भी असर पड़ सकता है।

सड़क निर्माण की लागत में भारी बढ़ोतरी

हिमाचल में सड़क निर्माण की लागत भी तेजी से बढ़ी है:

  • 3 मीटर चौड़ी सड़क की लागत ₹13.75 लाख से बढ़कर ₹17.75 लाख प्रति किमी हो गई।
  • 6 मीटर चौड़ी सड़क की लागत ₹27.50 लाख से बढ़कर ₹35.50 लाख प्रति किमी पहुंच गई।
  • 10 मीटर चौड़ी सड़क की लागत ₹41.25 लाख से बढ़कर ₹53.25 लाख प्रति किमी हो गई।
सरकार केंद्र से मदद मांग रही

हिमाचल सरकार ने इस संकट की जानकारी केंद्र सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय को दे दी है। दूसरी ओर, पड़ोसी राज्य हरियाणा ने सड़क निर्माण जारी रखने के लिए छह महीने तक आयातित बिटुमेन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

आगे और बढ़ सकती है परेशानी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष लंबा चलता है, तो बिटुमेन और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे न केवल सड़क निर्माण, बल्कि अन्य निर्माण कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने भी माना है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण बिटुमेन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 40% तक वृद्धि हुई है।