Punjab-Jammu and Kashmir के बीच फिर बढ़ा विवाद, 1979 के समझौते पर आमने-सामने दोनों सरकारें

15 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  Omar Abdullah ने एक बार फिर 1979 के उस समझौते की याद दिलाई है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को Ranjit Sagar Dam और Shahpur Kandi Barrage से बनने वाली कुल बिजली का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलना था। उनका कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि दोनों सरकारों के बीच हुआ “संप्रभु समझौता” है, जिसका पालन होना चाहिए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह इस मुद्दे को सीधे Bhagwant Mann के सामने उठाएंगे। उनके अनुसार, 20 जनवरी 1979 को हुए समझौते में जम्मू-कश्मीर को बस बार लागत पर 20 प्रतिशत बिजली, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और रोजगार देने का वादा किया गया था।

जम्मू-कश्मीर का दावा है कि बांध और उससे जुड़े कुछ हिस्से उसके क्षेत्र में आते हैं, इसलिए उसे बिजली में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। हालांकि, पंजाब का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को पहले परियोजना की लागत में अपना हिस्सा देना होगा। पंजाब सरकार ने जम्मू-कश्मीर से करीब 973 करोड़ रुपये की मांग की है, जिसमें Ranjit Sagar Dam के लिए 301 करोड़ रुपये और Shahpur Kandi Barrage के लिए 672 करोड़ रुपये शामिल हैं।

1979 के समझौते के अनुसार, जम्मू-कश्मीर को दोनों परियोजनाओं से बनने वाली बिजली का 20 प्रतिशत हिस्सा बस बार लागत पर मिलना है। इसके अलावा, परियोजना से प्रभावित परिवारों को मुआवजा और 800 से अधिक परिवारों को रोजगार देने का भी प्रावधान है। अब तक लगभग 85.48 करोड़ रुपये के मुआवजे में से 71.15 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जबकि करीब 14.32 करोड़ रुपये अभी बाकी हैं।

हालांकि 2019 में Punjab State Power Corporation Limited और Jammu and Kashmir Power Corporation Limited के बीच बिजली खरीद-बिक्री का समझौता भी हो चुका है, लेकिन ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण अभी तक जम्मू-कश्मीर को बिजली नहीं मिल पाई है। फिलहाल अस्थायी टैरिफ 3.5 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।