15 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: अमेरिका, ईरान और इज़रायल के बीच जारी तनाव के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया है। अमेरिकी नौसेना ईरान से निकलने वाले जहाजों की निगरानी कर रही है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार करने के बाद उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर कर रही है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब तक ईरान से जुड़े कम से कम आठ तेल टैंकरों को समुद्र में रोका जा चुका है। अमेरिका का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात और समुद्री व्यापार को बाधित कर उसे परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए दबाव में लाना है। वहीं, तेहरान ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और होर्मुज़ स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस्लामाबाद में हुई पिछली शांति वार्ता विफल रहने के बाद अब खबर है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि इस सप्ताह फिर बातचीत कर सकते हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वार्ता पाकिस्तान में दोबारा होने की संभावना है, हालांकि अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है।
चीन ने भी इस संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए मिडिल ईस्ट में सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की अपील की है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र में शांति बहाली के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। वहीं, IMF ने चेतावनी दी है कि यदि तेल आपूर्ति में बाधा और युद्ध की स्थिति जारी रही, तो दुनिया आर्थिक मंदी की ओर बढ़ सकती है।













