National Institute of Technology Hamirpur के छात्रों का कमाल: अंडे के छिलकों से बनी बायोडिग्रेडेबल रॉड से फ्रैक्चर इलाज में नई उम्मीद

13 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Himachal Desk:  हिमाचल प्रदेश स्थित National Institute of Technology Hamirpur के छात्रों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के मैटीरियल साइंस विभाग के विद्यार्थियों ने अंडे के छिलकों और जैविक तत्वों की मदद से एक विशेष ‘बायोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड’ विकसित किया है, जो हड्डियों के फ्रैक्चर के उपचार में उपयोगी साबित हो सकता है।

इस तकनीक की खास बात यह है कि यह स्कैफोल्ड हड्डी को जोड़ने के बाद शरीर में धीरे-धीरे स्वयं घुल जाता है। इससे मरीजों को पारंपरिक धातु (टाइटेनियम) रॉड हटाने के लिए दोबारा सर्जरी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय, खर्च और दर्द—तीनों में कमी आएगी।

यह प्रोजेक्ट Dr. Vikram Verma के मार्गदर्शन में छात्रों सक्षम, कृष, तनिष्क और प्रकृति द्वारा तैयार किया गया। इसके निर्माण के लिए अंडे के छिलकों से कैल्शियम कार्बोनेट निकाला गया, जिसे ऑर्थोफॉस्फोरिक एसिड के साथ रिएक्शन कर ‘हाइड्रॉक्सीएपेटाइट’ में बदला गया—यह वही तत्व है जो मानव हड्डियों का मुख्य घटक होता है।

इसके बाद इस पदार्थ को जिलेटिन और काइटोसैन जैसे बायोपॉलिमर के साथ मिलाकर -55°C तापमान पर प्रोसेस किया गया। तैयार स्कैफोल्ड हड्डी के अंदर प्राकृतिक संरचना की तरह कार्य करता है और समय के साथ शरीर में अवशोषित हो जाता है।

मौजूदा समय में फ्रैक्चर के इलाज के लिए टाइटेनियम रॉड का उपयोग किया जाता है, जिसे हटाने के लिए दूसरी सर्जरी करनी पड़ती है। इसके मुकाबले यह नई तकनीक ज्यादा सुरक्षित, किफायती और मरीज के लिए सुविधाजनक साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में हड्डियों से जुड़ी सर्जरी के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।