06 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: भारत सरकार ने देश के हवाईअड्डों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा उपकरणों की जांच और प्रमाणन के लिए देश में ही अत्याधुनिक टेस्टिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा।
BCAS और RRU के बीच समझौता
नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के बीच हुए समझौते के तहत यह सेंटर बनाया जाएगा। यहां फुल बॉडी स्कैनर (FBS) समेत सभी सुरक्षा उपकरणों की जांच, मूल्यांकन और प्रमाणन किया जाएगा।
क्या होगा इस सेंटर में?
इस हाई-टेक केंद्र में:
सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच और परीक्षण
सेफ्टी स्टैंडर्ड्स और रिसर्च
ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट
इंटरऑपरेबिलिटी टेस्टिंग
की जाएगी।
OEM (मूल उपकरण निर्माता) द्वारा बनाए गए उपकरणों का स्वतंत्र सत्यापन भी यहीं होगा।
🇮🇳 ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यह पहल भारत को विदेशी मानकों पर निर्भर रहने से मुक्त करेगी। अब देश अपने स्वदेशी एविएशन सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स विकसित करेगा और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा।
ग्लोबल स्टैंडर्ड्स की ओर बढ़ता भारत
सरकार का लक्ष्य है कि यह केंद्र अमेरिका के TSA और यूरोप के ECAC जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर काम करे। इससे भारत एविएशन सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन का ग्लोबल हब बन सकता है।
रिसर्च और ट्रेनिंग पर फोकस
इस पहल के तहत:
आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित होंगी
विशेषज्ञों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम और वर्कशॉप आयोजित किए जाएंगे
एक मजबूत एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क तैयार होगा
बढ़ती एयर ट्रैफिक के बीच जरूरी कदम
सरकार के मुताबिक:
2014 में 74 एयरपोर्ट थे, जो अब बढ़कर 165 हो गए हैं
हर घंटे करीब 250–300 फ्लाइट मूवमेंट
40–45 हजार यात्री प्रति घंटे सफर कर रहे हैं
एयर कार्गो में भी 50% की वृद्धि हुई है
ऐसे में हाई-टेक सुरक्षा और प्रोफेशनल सिस्टम की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
भविष्य की तैयारी
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत:
एविएशन सिक्योरिटी टेस्टिंग का ग्लोबल सेंटर बने
MRO (मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग) हब के रूप में विकसित हो
और एक सुरक्षित व आत्मनिर्भर एविएशन सिस्टम तैयार करे













