Kidney Racket: लापरवाही के बीच बची पारुल की जान, इलाज के बाद सुधरी हालत

2 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के मामले में पीड़ित पारुल तोमर की हालत अब धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। इलाज के बाद उसकी प्रत्यारोपित किडनी ने काम करना शुरू कर दिया है, जिससे Serum Creatinine का स्तर भी कम हुआ है—जो सुधार का संकेत माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई थी। न तो डोनर और मरीज की जरूरी इम्यूनोलॉजिकल जांच कराई गई और न ही एचएलए एंटीजन टेस्ट किया गया, जो किडनी ट्रांसप्लांट से पहले सबसे अहम प्रक्रिया होती है। इससे यह तय होता है कि नई किडनी शरीर में स्वीकार होगी या नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना जरूरी जांच के इस तरह ऑपरेशन करना मरीज की जान को खतरे में डाल सकता है, क्योंकि इससे संक्रमण और किडनी रिजेक्शन का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसके बावजूद ऑपरेशन के बाद भी उचित मेडिकल फॉलोअप नहीं किया गया।

फिलहाल पारुल का इलाज जारी है और डॉक्टरों के अनुसार किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे सुधर रही है। हालांकि, अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की सुविधा न होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की तैयारी भी की जा रही है।

इस मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के तार साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को टेलीग्राम ग्रुप के जरिए अवैध सौदों के संकेत मिले हैं, जिसमें कुछ अस्पतालों से जुड़े लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।

मामले के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है और नर्सिंग होम्स के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।