Autism Alert: किन बच्चों में ज्यादा होता है ऑटिज्म का खतरा? समय रहते पहचानें ये संकेत

31 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk: ऑटिज्म एक तेजी से बढ़ती न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या है, जो बच्चों के दिमाग के विकास और उनके व्यवहार को प्रभावित करती है। World Health Organization के अनुसार, यह समस्या बच्चों के सामाजिक व्यवहार, संवाद और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर डालती है। दुनिया भर में लगभग 1% बच्चों में Autism Spectrum Disorder पाया जाता है।

क्या है ऑटिज्म?
ऑटिज्म को मेडिकल भाषा में Autism Spectrum Disorder कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे के सोचने, समझने और दूसरों से जुड़ने के तरीके में अंतर होता है। इसके लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं।

कैसे पहचानें ऑटिज्म के संकेत?
माता-पिता को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर खास ध्यान देना चाहिए। कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं:

  • नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना
  • आंखों में देखकर बात न करना
  • अकेले रहना पसंद करना
  • एक ही शब्द या गतिविधि को बार-बार दोहराना
  • एक काम से दूसरे काम में बदलाव करने में दिक्कत
  • सामाजिक मेलजोल में परेशानी

किन बच्चों में ज्यादा खतरा होता है?
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ बच्चों में ऑटिज्म का जोखिम अधिक हो सकता है:

  • समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) बच्चे
  • जन्म के समय कम वजन वाले शिशु
  • जिनके परिवार में पहले से ऑटिज्म का इतिहास हो
  • जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं होती या नींद की गुणवत्ता खराब होती है

इलाज और सावधानी
विशेषज्ञों के मुताबिक ऑटिज्म का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय रहते पहचान और थेरेपी से बच्चों की स्थिति में काफी सुधार किया जा सकता है।

माता-पिता को सलाह दी जाती है कि यदि 2–3 साल की उम्र में बच्चे के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। सही समय पर हस्तक्षेप से बच्चे की सामाजिक और शैक्षणिक क्षमताओं को बेहतर बनाया जा सकता है।

नोट: यह जानकारी मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित है, किसी भी निर्णय से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें