11 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Iran–Israel conflict के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई को लेकर मंत्रियों को अहम निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट का बोझ देश के आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति तथा कीमतों पर लगातार निगरानी रखी जाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए रणनीति में कई बदलाव किए हैं, ताकि वैश्विक संकट के बावजूद घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी न आए। खास तौर पर घरेलू और कमर्शियल Liquefied Petroleum Gas (LPG) की आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की रणनीति के प्रमुख बिंदु
एलपीजी संकट से निपटने के लिए कमेटी: Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो रेस्टोरेंट एसोसिएशन से संवाद कर आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करेगी।
घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी: बेहतर सप्लाई मैनेजमेंट के कारण पिछले कुछ दिनों में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
नए आयात मार्ग: भारत अब अपनी करीब 70 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति Strait of Hormuz के बजाय वैकल्पिक समुद्री रास्तों से प्राप्त कर रहा है।
रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर: देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और मिडिल ईस्ट के तनाव का इनके संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है।
निर्यात नीति बरकरार: सरकार ने फिलहाल रिफाइंड तेल के निर्यात पर रोक लगाने का कोई फैसला नहीं लिया है।
नए कंसाइनमेंट आने वाले: एलपीजी और Liquefied Natural Gas के नए कंसाइनमेंट जल्द भारत पहुंचने वाले हैं, जिससे स्टॉक और मजबूत होगा।
क्यों कम है खतरा
मिडिल ईस्ट में तनाव के समय आमतौर पर तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई चेन में बाधा की आशंका रहती है। हालांकि सरकार का दावा है कि ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और वैकल्पिक आयात मार्गों की वजह से भारत की स्थिति इस बार पहले से ज्यादा मजबूत है।
सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में विविध आपूर्ति और बेहतर प्रबंधन के कारण पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बड़े अनियंत्रित उछाल की संभावना फिलहाल कम है।













