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ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर: Mojtaba Khamenei संभालेंगे कमान, जानें कितना शक्तिशाली है यह पद

09 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  Iran में सत्ता का बड़ा बदलाव हुआ है। देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद ‘सुप्रीम लीडर’ के रूप में Mojtaba Khamenei को नियुक्त किया गया है। वह पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं और अब इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बन गए हैं।

यह घोषणा ईरान की Assembly of Experts द्वारा की गई, जिसने आधिकारिक रूप से मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगाई। इसके बाद ईरानी सरकारी टीवी पर भी उनके नए सुप्रीम लीडर बनने की जानकारी प्रसारित की गई।

लंबे समय से थे प्रमुख दावेदार

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। वह अपने पिता के करीबी सलाहकारों में शामिल रहे हैं और धार्मिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने अब तक कोई औपचारिक या निर्वाचित सरकारी पद नहीं संभाला था।

माना जाता है कि उनका ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से भी करीबी संबंध रहा है। उनके सुप्रीम लीडर बनने के बाद देश में जहां कुछ जगहों पर जश्न मनाया गया, वहीं कई लोगों ने विरोध भी जताया।

कितना शक्तिशाली होता है सुप्रीम लीडर का पद?

ईरान में सुप्रीम लीडर का पद देश की सबसे शक्तिशाली संवैधानिक और धार्मिक भूमिका माना जाता है। इस पद के पास सेना, न्यायपालिका, मीडिया और कई अहम संस्थाओं पर अंतिम नियंत्रण होता है।

सुप्रीम लीडर को देश के बड़े रणनीतिक और राजनीतिक फैसलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार होता है। यहां तक कि कई मामलों में यह पद राष्ट्रपति से भी अधिक शक्तिशाली माना जाता है।

अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में Iran और United States के बीच तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump पहले भी कह चुके हैं कि ईरान में नए सुप्रीम लीडर के चयन को लेकर उनकी मंजूरी जरूरी है। उनके इस बयान को ईरान के लिए कड़ी चेतावनी के रूप में देखा गया था।

क्षेत्र में जारी संघर्ष

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच यह राजनीतिक बदलाव हुआ है। हालिया हमलों और जवाबी कार्रवाई में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।