07 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Rashifal Desk: भारतीय संस्कृति में मंदिर में दर्शन के बाद परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करने की परंपरा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। परिक्रमा का अर्थ होता है भगवान के चारों ओर घूमकर श्रद्धा, समर्पण और आभार व्यक्त करना। आमतौर पर भक्त तीन परिक्रमा करते हैं, क्योंकि यह सत्व, रज और तम – इन तीन गुणों का प्रतीक माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य Dr. Basavaraj Guruji के अनुसार परिक्रमा करते समय भक्त भगवान से अपने मन, वाणी और कर्म को शुद्ध रखने की प्रार्थना करते हैं। हालांकि अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की संख्या अलग मानी जाती है।
अलग-अलग देवी-देवताओं की परिक्रमा संख्या
1. Ganesha (गणपति)
गणेश जी के लिए एक परिक्रमा ही पर्याप्त मानी जाती है। इसे शांत भाव से धीरे-धीरे करना शुभ माना जाता है।
2. Shiva (भगवान शिव)
शिव मंदिर में पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। परंपरा के अनुसार आधी परिक्रमा (सोमसूत्र तक) करना उचित माना जाता है।
3. Durga / देवी मंदिर
देवी मंदिरों में चार परिक्रमा करने का विधान बताया गया है, जो चारों दिशाओं का प्रतीक माना जाता है।
4. Surya (सूर्य देव)
सूर्य देव के लिए सात परिक्रमा करने का नियम माना जाता है। कई लोग सूर्य नमस्कार करते समय भी सात बार प्रदक्षिणा करते हैं।
सामान्य नियम क्या है?
आम तौर पर मंदिरों में तीन परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। यह तीन लोक (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) और तीन गुणों का प्रतीक माना जाता है।
मन्नत के अनुसार भी परिक्रमा
कई भक्त अपनी श्रद्धा और मन्नत के अनुसार 11, 21 या 108 परिक्रमा भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई परिक्रमा भक्त को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष देती है।













