06 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: ईरान-इजराइल जंग के बीच अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। इस फैसले को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी दूसरे देश का भारत को तेल खरीदने की “इजाज़त” देना देश की संप्रभुता पर सवाल खड़ा करता है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिकी वित्त मंत्री द्वारा भारत को 30 दिनों तक रूस से तेल खरीदने की अनुमति देने की बात कहना भारत की आज़ादी और संप्रभुता पर करारा तमाचा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका कौन होता है भारत को अनुमति देने वाला और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राहुल गांधी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह ट्रंप का नया राजनीतिक खेल है, जिसमें भारत को रूस से तेल लेने की सीमित अनुमति दी जा रही है। उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव की राजनीति बताया।
वहीं कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी आखिर कौन होते हैं जो भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दें। उन्होंने सवाल किया कि भारत सरकार इस तरह के बयान क्यों बर्दाश्त कर रही है और क्या वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव के सामने नरम पड़ते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि क्या अब भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए भी अमेरिका की अनुमति लेनी पड़ेगी।
दरअसल, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के तहत भारत को यह अस्थायी छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि ईरान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है और ऐसे में तेल आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए भारत को 30 दिनों की यह राहत दी गई है।













