हिमाचल की हुंकार: पानी पर 50% रॉयल्टी की मांग, CM सुक्खू ने केंद्र से उठाया बड़ा मुद्दा

05 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Himachal Desk:  Sukhvinder Singh Sukhu ने केंद्र सरकार से हिमाचल की जल संपदा पर बड़ा हक मांगते हुए कहा है कि हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले पानी पर राज्य को 50% रॉयल्टी दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे राज्य को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी, खासकर तब जब केंद्र ने हाल ही में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद करने का फैसला किया है।

शिमला में मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman के सामने भी प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य की संपत्ति यानी पानी पर 50% रॉयल्टी मिलती है, तो हिमाचल को RDG की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

सीएम सुक्खू ने कहा कि National Hydroelectric Power Corporation, NTPC Limited और Satluj Jal Vidyut Nigam Limited जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हिमाचल के जल संसाधनों का उपयोग कर रही हैं और आज ये कंपनियां मिनी नवरत्न के स्तर तक पहुंच चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि इस साल SJVNL का बजट लगभग 67,000 करोड़ रुपये है, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार का बजट करीब 58,000 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य के पानी का इस्तेमाल मुफ्त में किया जा रहा है, इसलिए इन परियोजनाओं से होने वाले मुनाफे का कम से कम आधा हिस्सा हिमाचल को मिलना चाहिए।

सुक्खू ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 275(1) उन राज्यों को रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट देने का प्रावधान करता है, जिनकी आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर होता है। इसलिए RDG हिमाचल प्रदेश के लोगों का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि भारत एक सहकारी संघीय ढांचे पर चलता है और राज्यों को अपने अधिकारों की बात रखने का पूरा हक है।

वहीं मध्य-पूर्व में चल रहे संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि खाड़ी देशों में फंसे हिमाचली लोगों को हर संभव मदद दी जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।