World Hearing Day: जन्म से पहले ही पता चलेगा बच्चे की सुनने की क्षमता, All India Institute of Medical Sciences Delhi का प्रयास

03 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  World Hearing Day के मौके पर एक अहम पहल सामने आई है। All India Institute of Medical Sciences Delhi (एम्स दिल्ली) के डॉक्टर इस दिशा में काम कर रहे हैं कि बच्चे के जन्म से पहले, यानी गर्भावस्था के दौरान ही यह पता लगाया जा सके कि शिशु सुन पा रहा है या नहीं। एम्स के ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. कपिल सिक्का के अनुसार, गर्भ में पल रहे बच्चे की सुनने की क्षमता का आकलन करने के लिए कुछ विशेष टेस्ट उपलब्ध हैं और संस्थान इन्हीं तकनीकों को और प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है। हालांकि फिलहाल उपचार जन्म के बाद ही संभव है, लेकिन पहले से जानकारी होने पर समय रहते योजना बनाई जा सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के बाद भी सुनने की जांच बेहद जरूरी है। नियोनेटल हियरिंग स्क्रीनिंग जन्म के 24 से 48 घंटे के भीतर की जा सकती है, जिससे शुरुआती महीनों में ही समस्या की पहचान हो सके। अगर जीवन के पहले छह महीनों में सुनने की कमी का पता चल जाए, तो इलाज के बेहतर परिणाम मिलते हैं और बच्चे के भाषा विकास पर गंभीर असर नहीं पड़ता। लेकिन कई अस्पतालों में यह स्क्रीनिंग नियमित रूप से नहीं हो पाती, जिसके कारण कई बार माता-पिता को समस्या का पता तब चलता है जब बच्चा एक साल के आसपास का हो जाता है और आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता।

उपचार की बात करें तो गंभीर मामलों में कॉक्लियर इम्प्लांट प्रभावी साबित हो सकता है। इसके अलावा ऑडिटरी ब्रेन स्टेम इम्प्लांट जैसी आधुनिक तकनीकें भी जटिल नर्व संबंधी बहरापन के मामलों में मददगार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और हस्तक्षेप से बच्चे का सामान्य विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।