चंडीगढ़, 2 मार्च 2026।
Punjab Desk: Punjab के टैक्स विभाग ने एक निजी मीडिया फर्म से जुड़े बड़े जीएसटी और सर्कुलेशन घोटाले का खुलासा किया है। जांच में पिछले तीन वर्षों के दौरान 65 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। यह मामला The Hind Samachar Limited से जुड़ा बताया जा रहा है, जो Punjab Kesari Group की प्रमुख इकाई है।
एक साथ कई शहरों में कार्रवाई
5 फरवरी 2026 को जालंधर के सिविल लाइंस स्थित मुख्य कार्यालय में जांच की गई। इसके साथ ही लुधियाना और बठिंडा स्थित इकाइयों में भी समानांतर कार्रवाई हुई। यह कार्रवाई जीएसटी रिटर्न, माल ढुलाई दस्तावेजों और टोल प्लाजा रिकॉर्ड के मिलान के आधार पर की गई।
16,807 मीट्रिक टन कागज का दावा, परिवहन रिकॉर्ड संदिग्ध
जांच में पाया गया कि कंपनी ने तीन वित्तीय वर्षों में 16,807 मीट्रिक टन अखबारी कागज की खरीद और आपूर्ति दर्शाई।
10,247 मीट्रिक टन सीधी खरीद
6,560 मीट्रिक टन अन्य इकाइयों को भेजा गया
इनका कुल मूल्य करीब 65.61 करोड़ रुपये बताया गया। यह मात्रा लगभग 21 करोड़ अखबारों की छपाई के बराबर बताई गई।
हालांकि, 407 परिवहन प्रपत्रों में से 219 में “कोई आवाजाही नहीं” दर्ज पाई गई। कई वाहनों की लोकेशन रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित मार्गों से मेल नहीं खाई। 457 बाहरी आपूर्ति प्रपत्रों के मामले में भी टोल रिकॉर्ड से माल की वास्तविक डिलीवरी की पुष्टि नहीं हो सकी। माल रसीद, भाड़ा रजिस्टर और प्राप्ति प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किए गए।
संदिग्ध और रद्द पंजीकरण वाले सप्लायर
जांच में यह भी सामने आया कि जिन सप्लायरों से खरीद दर्शाई गई, उनमें से कई के जीएसटी पंजीकरण रद्द या निलंबित पाए गए। आपूर्ति श्रृंखला में सीमित नेटवर्क की कंपनियां शामिल थीं, जिनका किसी बड़े निर्माता या आयातक से सीधा संबंध नहीं मिला।
विज्ञापन एजेंसियां भी जांच के दायरे में
मामले में 10 विज्ञापन एजेंसियों की भी जांच की गई। लुधियाना की एक एजेंसी ने जांच के दौरान 16.35 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा किए। अन्य एजेंसियों के संबंध में जांच जारी है।
प्रसार संख्या पर भी सवाल
जांच के दौरान यह सवाल उठा कि यदि कागज की वास्तविक आपूर्ति संदिग्ध है, तो घोषित संख्या में अखबारों की छपाई कैसे हुई। स्टॉक रजिस्टर, खपत विवरण और माल की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे कंपनी के दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
सरकार का सख्त रुख
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी संस्था कानून से ऊपर नहीं है। प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ कर नियमों से छूट नहीं है। मामले में खातों का मिलान, संबंधित व्यक्तियों के बयान और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच जारी है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर वसूली भी की जाएगी।
टैक्स विभाग के अनुसार यह मामला केवल लेखा त्रुटि नहीं बल्कि संभावित रूप से सुनियोजित कर अनियमितता की ओर संकेत करता है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जा सकती है।













