25 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: Chandigarh District Court ने विवाह के सात वर्ष के भीतर हुई एक विवाहित महिला की संदिग्ध मृ*त्यु के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट Sachin Yadav ने सेक्टर-34 थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि मामले में FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाए। यह आदेश 18 फरवरी 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत दायर याचिका का निस्तारण करते हुए पारित किया गया।
मामले का संक्षेप:
शिकायतकर्ता Gurtej Singh ने अदालत को बताया कि उनकी बहन की शादी नवंबर 2021 में हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे पति और ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मार्च 2023 में बेटी के जन्म के बाद कथित तौर पर उसे ताने दिए गए और कई बार घर से निकाला गया। 7 जनवरी 2025 को परिवार को महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौ*त की सूचना मिली।
पुलिस की अब तक की कार्रवाई:
पुलिस के अनुसार, चूंकि मामला विवाह के सात वर्ष के भीतर हुई कथित आत्महत्या से जुड़ा था, इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196 के तहत पंचनामा किया गया। शव का पोस्टमार्टम कर नमूने CFSL भेजे गए। इसके बावजूद, 30 जनवरी और 11 फरवरी 2025 को शिकायत देने के बाद भी FIR दर्ज नहीं की गई।
अदालत की टिप्पणी:
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं, ऐसे में FIR दर्ज करना पुलिस का वैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Lalita Kumari बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR अनिवार्य है। साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-क का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की आ*त्महत्या हुई हो और क्रूरता के आरोप हों, तो आ*त्महत्या के लिए उकसाने की कानूनी धारणा लागू हो सकती है।
आगे की कार्रवाई:
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सेक्टर-34 थाना को संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।













