21 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: शेयर बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव और सोना–चांदी के अपने हालिया उच्च स्तर से फिसलने के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा है—पोर्टफोलियो में किस एसेट को ज्यादा वेटेज दिया जाए? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इक्विटी, गोल्ड और सिल्वर के बीच सही संतुलन बनाने के लिए गोल्ड–सिल्वर रेश्यो और निफ्टी–गोल्ड रेश्यो जैसे पारंपरिक इंडिकेटर्स बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।
उम्र के हिसाब से तय करें निवेश का रिस्क
Optima Money Managers के CEO और MD पंकज मथपाल के मुताबिक, रिस्की एसेट्स में निवेश का एक आसान नियम है—
100 में से अपनी उम्र घटाएं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 35 साल है तो करीब 65% निवेश इक्विटी, गोल्ड और सिल्वर जैसे रिस्की एसेट्स में होना चाहिए, जबकि बाकी 35% रकम डेट या कम जोखिम वाले इंस्ट्रूमेंट्स में रखें। यह रणनीति उम्र बढ़ने के साथ पोर्टफोलियो के रिस्क को धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है।
निफ्टी–गोल्ड रेश्यो क्या संकेत देता है?
इक्विटी और गोल्ड के बीच सही समय पर फैसला लेने के लिए Securities and Exchange Board of India (SEBI) से रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता निफ्टी–गोल्ड रेश्यो देखने की सलाह देते हैं।
अगर यह रेश्यो 2.50 से नीचे हो, तो इसका मतलब है कि गोल्ड महंगा है और इक्विटी तुलनात्मक रूप से सस्ती।
मौजूदा स्तरों पर यह रेश्यो इक्विटी के पक्ष में इशारा कर रहा है, यानी गोल्ड के मुकाबले स्टॉक्स में बेहतर अवसर बन सकते हैं।
गोल्ड या सिल्वर—किस पर लगाएं दांव?
PACE 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल के अनुसार, बुलियन में निवेश के लिए गोल्ड–सिल्वर रेश्यो सबसे अहम इंडिकेटर है।
आमतौर पर इस रेश्यो का 80 का स्तर बेंचमार्क माना जाता है—
रेश्यो 80 से ऊपर → सिल्वर को प्राथमिकता
रेश्यो 80 से नीचे → गोल्ड को प्राथमिकता
फिलहाल यह रेश्यो 80 से काफी नीचे है, इसलिए मौजूदा हालात में सिल्वर की तुलना में गोल्ड को ज्यादा मजबूत विकल्प माना जा रहा है। रेश्यो की गणना के लिए उन्होंने COMEX प्राइस का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
अभी किस एसेट को दें सबसे ज्यादा वेटेज?
एक्सपर्ट्स की साझा राय है कि मौजूदा बाजार माहौल में डाइवर्सिफिकेशन के साथ इक्विटी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देना समझदारी होगी। इसके बाद गोल्ड और अंत में सिल्वर को पोर्टफोलियो में जगह दी जा सकती है।
सही रेश्यो, उम्र-आधारित एलोकेशन और संतुलित रणनीति अपनाकर निवेशक उतार-चढ़ाव भरे बाजार में भी बेहतर और स्थिर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। 📊💰













