20 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: मोतियाबिंद बढ़ती उम्र में होने वाली आंखों की एक आम बीमारी है। इसमें आंख के लेंस पर झिल्ली जम जाती है, जिससे धीरे-धीरे धुंधलापन बढ़ने लगता है और साफ दिखाई देना मुश्किल हो जाता है। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह समस्या गंभीर हो सकती है और आंखों की रोशनी पर स्थायी असर डाल सकती है।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब जरूरी होता है?
दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के नेत्र रोग विभाग के सीनियर डॉक्टर डॉ. ए.के. ग्रोवर के अनुसार, मोतियाबिंद का ऑपरेशन तब जरूरी हो जाता है जब इसकी वजह से रोजमर्रा के कामों में परेशानी आने लगे।
अगर आपको धुंधला दिख रहा है, पढ़ने में दिक्कत हो रही है, रात में गाड़ी चलाने में समस्या हो या एक चीज दो-दो दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में ये लक्षण दिखें तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर सर्जरी कराने से आंखों की रोशनी को जाने से बचाया जा सकता है।
समय पर ऑपरेशन न कराने के नुकसान
अगर मोतियाबिंद का ऑपरेशन देर से कराया जाए, तो लेंस पूरी तरह सख्त हो सकता है। इससे सर्जरी जटिल हो जाती है और आंखों में सूजन, दर्द या रोशनी कम होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जैसे ही नजर कमजोर होने लगे, जांच कराकर सही समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है।
मोतियाबिंद सर्जरी से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि सर्जरी सुरक्षित और सफल रहे।
ऑपरेशन से पहले ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना जरूरी है। आंखों से जुड़े सभी जरूरी टेस्ट कराएं और अगर आप ब्लड थिनर या कोई अन्य नियमित दवा लेते हैं, तो इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।
संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह से कुछ दिनों तक एंटीबायोटिक आई ड्रॉप डालना भी जरूरी होता है। साथ ही, हाई बीपी या डायबिटीज की दवाएं समय पर लेते रहें और किसी भी तरह की लापरवाही न करें।
निष्कर्ष
मोतियाबिंद एक आम लेकिन इलाज योग्य समस्या है। सही समय पर ऑपरेशन और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से आंखों की रोशनी सुरक्षित रखी जा सकती है। अगर नजर में बदलाव महसूस हो रहा है, तो देर किए बिना विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे बेहतर विकल्प है।













