रविवार, 15 फरवरी 2026 Fact Recorder
Rashifal Desk: निर्जन, हिमाच्छादित कैलाश पर्वत पर रहने वाले भगवान शिव को हम महायोगी, वैरागी और तपस्वी के रूप में जानते हैं। जिनके लिए न भूख मायने रखती है, न प्यास और न ही सांसारिक बंधन। लेकिन शिव के जीवन में भी एक ऐसा मोड़ आया, जब उन्होंने वैराग्य का मार्ग छोड़कर गृहस्थ जीवन को अपनाया।
इसी दिव्य क्षण की स्मृति में हर वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। विवाह के बाद भोलेनाथ कैलाश से उतरकर गंगा तट पर बसे काशी में निवास करने लगे। जहां कैलाश निर्जीव, शीतल और एकांत था, वहीं काशी जीवन, उष्मा और उर्वरता का प्रतीक है।
❓ आखिर शिव ने विवाह क्यों किया?
यह प्रश्न जितना सरल दिखता है, उत्तर उतना ही गहरा है।
पुराणों और कथाओं में सामान्यतः बताया गया है कि राक्षस ताड़कासुर के वध के लिए शिव-पुत्र की आवश्यकता थी और इसी कारण देवताओं ने शिव का विवाह कराया। लेकिन यह कारण इस महान निर्णय की केवल सतह को छूता है।
🕉️ सृष्टि की ज़रूरतों के लिए लिया गृहस्थ धर्म
पंडितों और शास्त्रों के अनुसार, महादेव स्वयं इच्छा-रहित हैं। उन्हें किसी सुख, भोग या उपलब्धि की चाह नहीं है। लेकिन जिस सृष्टि की रक्षा और संचालन का दायित्व उनके कंधों पर है, उसकी आवश्यकताएं अलग हैं।
यही कारण है कि शिव ने अपनी नहीं, बल्कि सृष्टि की जरूरतों को प्राथमिकता दी। लोगों को यह संदेश देने के लिए कि जीवन केवल त्याग से नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व से भी चलता है, उन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाया और माता पार्वती से विवाह किया।
🤍 शिव-शक्ति का मिलन: संवेदना का प्रतीक
शिव और शक्ति का मिलन केवल विवाह नहीं, बल्कि संवेदना और करुणा का प्रतीक है।
जैसे कोई व्यक्ति स्वयं किसी वस्तु की इच्छा न रखे, लेकिन अपने परिवार और समाज की जरूरतों को समझे—ठीक वैसा ही शिव ने किया।
पार्वती जी ने महायोगी शिव को संसार की भूख, पीड़ा और आवश्यकताओं से जोड़ा। यह विवाह यह सिखाता है कि वैराग्य और करुणा साथ-साथ चल सकते हैं।
🐘⚔️ गणेश और कार्तिकेय: मानव जीवन की दो बुनियादी जरूरतें
शिव परिवार का हर सदस्य मानव जीवन के किसी न किसी मूल पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है—
भगवान गणेश:
समृद्धि, अन्न और तृप्ति के प्रतीक। उनका विशाल उदर इस बात का संकेत है कि भूख और अभाव का अंत आवश्यक है। इसलिए वे मां अन्नपूर्णा से जुड़े हैं।भगवान कार्तिकेय:
शौर्य और सुरक्षा के प्रतीक। देवताओं के सेनापति के रूप में वे भय से मुक्ति और रक्षा का संदेश देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा।
🌺 शिव परिवार देता है जीवन जीने की पूर्ण शिक्षा
शिव परिवार हमें सिखाता है कि जीवन के लिए—
लक्ष्मी (संसाधन) जरूरी हैं
दुर्गा (सुरक्षा) आवश्यक है
और शिव-शक्ति का संतुलन जीवन को पूर्ण बनाता है
महायोगी शिव का गृहस्थ बनना इस बात का प्रमाण है कि त्याग तभी महान है, जब वह दूसरों की भलाई के लिए हो।













