महंगाई के हिसाब से बढ़े प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी; राज्यसभा में राघव चड्ढा की बड़ी मांग

13 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में निजी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया है। राज्यसभा में यूनियन बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार से मांग की कि देश में ‘इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिविज़न एक्ट’ लाया जाए, ताकि प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की सैलरी महंगाई के अनुरूप बढ़े।

राघव चड्ढा ने कहा कि वित्त वर्ष 2018 से 2026 के बीच सैलरीड क्लास की वास्तविक आय में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट आई है, क्योंकि वेतन वृद्धि महंगाई की रफ्तार के मुकाबले बेहद कम रही। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को तो डियरनेस अलाउंस (DA) और पे कमीशन के जरिए महंगाई से सुरक्षा मिलती है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी इस संरक्षण से पूरी तरह वंचित हैं।

20 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा फायदा
सांसद ने बताया कि यदि यह कानून लागू होता है, तो फॉर्मल सेक्टर, कॉर्पोरेट, फैक्ट्री, गिग वर्कर्स समेत करीब 20 करोड़ लोग, यानी लगभग 45% वर्कफोर्स को सीधा लाभ मिलेगा। इससे महंगाई के कारण होने वाले वेतन नुकसान पर रोक लगाई जा सकेगी।

दुनिया के कई देशों में पहले से लागू
राघव चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में COLA सिस्टम, जर्मनी में हर 18–24 महीने में वेतन संशोधन, जापान का शंटो सिस्टम और बेल्जियम में ऑटोमैटिक इंडेक्सेशन पहले से लागू है। इसके उलट भारत जैसे बड़े देश में 85% फॉर्मल वर्कफोर्स के पास कोई वैधानिक इन्फ्लेशन प्रोटेक्शन नहीं है।

मिडिल क्लास को बजट में निराशा
उन्होंने बजट में मिडिल क्लास की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि न तो इनकम टैक्स स्लैब बदले गए और न ही स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया गया। राघव चड्ढा ने सरकार से स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने की मांग की।

‘राइट टू रिकॉल’ की भी उठाई मांग
इसके अलावा सांसद ने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ‘राइट टू रिकॉल’ की वकालत की। उन्होंने कहा कि जैसे जनता के पास प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है, वैसे ही काम न करने वाले MP-MLA को हटाने की शक्ति भी जनता को मिलनी चाहिए।
राघव चड्ढा के इस भाषण को सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है, खासकर मिडिल क्लास और युवा वर्ग के बीच उनकी मांगों की खूब चर्चा हो रही है।