09 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Education Desk: राजस्थान सरकार ने स्कूल शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों को ऑटोमैटिक प्रमोशन नहीं मिलेगा। यानी अगर कोई छात्र फाइनल परीक्षा में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाता है, तो उसे फेल माना जाएगा। हालांकि ऐसे छात्रों को सुधार का मौका जरूर दिया जाएगा।
नए नियमों के तहत 5वीं और 8वीं में फेल होने वाले छात्रों के लिए रिजल्ट जारी होने के 45 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा कराई जाएगी। इस परीक्षा का आयोजन संबंधित स्कूलों की जिम्मेदारी होगी।
पहले क्या था नियम?
अब तक राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में 8वीं कक्षा तक ऑटोमैटिक प्रमोशन सिस्टम लागू था। इसके तहत 5वीं और 8वीं के बोर्ड एग्जाम में न्यूनतम अंक न लाने वाले छात्रों को भी अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था। इससे कमजोर छात्र बिना मजबूत आधार के आगे बढ़ जाते थे।
अब क्या बदलेगा?
नए फैसले के अनुसार, 5वीं और 8वीं की फाइनल परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों का परिणाम फेल ही घोषित किया जाएगा। हालांकि उन्हें 45 दिन के भीतर दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इस दौरान स्कूल और शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे ऐसे छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं और अतिरिक्त पढ़ाई की व्यवस्था करें, ताकि उनका प्रदर्शन बेहतर हो सके।
क्यों लिया गया यह फैसला?
राजस्थान सरकार का मानना है कि अनिवार्य प्रमोशन की वजह से छात्र पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते थे। कमजोर छात्र अगली कक्षा में पहुंच तो जाते थे, लेकिन आगे चलकर कठिन पाठ्यक्रम के कारण फेल हो जाते थे या स्कूल छोड़ देते थे। नए नियम का उद्देश्य पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारना, छात्रों को जिम्मेदार बनाना और स्कूल ड्रॉपआउट की समस्या को कम करना है।
इस फैसले के बाद राजस्थान में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।













