Cyber Security: राष्ट्रपति मुर्मू ने साइबर धोखाधड़ी पर जताई चिंता, स्कूल पाठ्यक्रम में डिजिटल–वित्तीय साक्षरता की वकालत

07 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Education Desk:  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में बढ़ती साइबर धोखाधड़ी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे लोगों की जीवनभर की कमाई एक झटके में खत्म हो जाती है और उन्हें मानसिक व सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को मजबूत करने और इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया, ताकि बच्चे कम उम्र से ही तकनीक के फायदे और जोखिम समझ सकें।

राष्ट्रपति ओडिशा सरकार और ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क (GFTN) के सहयोग से आयोजित ‘ब्लैक स्वान समिट’ में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि तकनीक में देश की अर्थव्यवस्था और समाज को आगे बढ़ाने की अपार क्षमता है, लेकिन इसके दुरुपयोग से ऑनलाइन और वित्तीय फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।

जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
राष्ट्रपति ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है। डिजिटल टूल्स का सुरक्षित उपयोग, मजबूत पासवर्ड, संदिग्ध लिंक से दूरी और समय पर शिकायत जैसे उपायों पर उन्होंने विशेष जोर दिया।

सरकारी पहल और नई चुनौतियां
डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए केंद्र सरकार की पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र जैसे तंत्र बनाए गए हैं।
साथ ही, उन्होंने आगाह किया कि तेज तकनीकी प्रगति के साथ साइबर सुरक्षा खतरे, डीपफेक, गलत सूचना और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

फिनटेक, समावेशन और महिलाओं की भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है—किसान, छोटे दुकानदार और महिलाएं डिजिटल भुगतान और बैंकिंग से जुड़ रही हैं। उन्होंने महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि फिनटेक इकोसिस्टम को महिलाओं को केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि नेता, पेशेवर और उद्यमी के रूप में भी देखना चाहिए।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस
उन्होंने कहा कि दूर-दराज, आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में आज भी डिजिटल कौशल की कमी है। इन वर्गों को डिजिटल प्रशिक्षण देना जरूरी है ताकि वे विकास की प्रक्रिया में बराबरी से शामिल हो सकें। अंत में, राष्ट्रपति ने उद्यमियों से अपील की कि तकनीक को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का माध्यम बनाया जाए।