World Cancer Day 2026: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा कैंसर का खतरा, दिल्ली की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

4 फरवरी 2026 Fact Recorder

Health Desk:  कैंसर अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से युवाओं के लिए भी जानलेवा चुनौती बनता जा रहा है। वर्ल्ड कैंसर डे 2026 के मौके पर दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली हर तीन में से एक मौत 44 साल से कम उम्र के लोगों में दर्ज की गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर दुनिया भर में मौतों का एक बड़ा कारण है। वर्ष 2020 में लगभग एक करोड़ लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई थी। ब्रेस्ट, फेफड़े, कोलन, रेक्टम और प्रोस्टेट कैंसर सबसे ज्यादा जान लेने वाली बीमारियों में शामिल हैं। इसी वैश्विक ट्रेंड की झलक अब दिल्ली के आंकड़ों में भी साफ दिख रही है।

दिल्ली में युवाओं पर बढ़ता खतरा
सरकारी रिपोर्ट बताती है कि पिछले 20 वर्षों में दिल्ली में कैंसर से 1.1 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। साल 2005 में जहां करीब 2,000 मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 7,400 तक पहुंच गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर से होने वाली मौतें दिल्ली में हर साल औसतन 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं, जो जनसंख्या वृद्धि से कहीं अधिक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में बढ़ते मामलों की प्रमुख वजहें देर से बीमारी का पता चलना, स्क्रीनिंग की कमी, तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन, प्रदूषण, अस्वस्थ जीवनशैली और लगातार बढ़ता तनाव हैं। कई मामलों में लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच जाती है।

कौन सा कैंसर ज्यादा जानलेवा?
आंकड़ों के मुताबिक, पुरुषों में कैंसर से मौत के मामले महिलाओं की तुलना में अधिक हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर सबसे ज्यादा घातक साबित हो रहे हैं, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट और सांस की नली से जुड़े कैंसर जानलेवा बन रहे हैं। 25 से 44 वर्ष की उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर मौत का प्रमुख कारण हैं, वहीं मुंह और गले के कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े गंभीर खतरे को दिखाते हैं।

समाधान क्या है?
कैंसर विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जांच (स्क्रीनिंग) और शुरुआती लक्षणों की पहचान से बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। डॉक्टर युवाओं से अपील कर रहे हैं कि शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव—जैसे गांठ, लगातार छाले, असामान्य ब्लीडिंग या आवाज में बदलाव—को हल्के में न लें। इसके साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, तंबाकू-शराब से दूरी और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है।