हिमाचल में बजट से पहले विशेष सत्र की तैयारी: राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर कैबिनेट बैठक में होगा फैसला

शिमला, 4 फरवरी 2026 Fact Recorder

Himachal Desk:  केंद्रीय बजट में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को पूरी तरह समाप्त किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार बजट से पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इस संबंध में अंतिम फैसला आठ फरवरी को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जा सकता है। यदि सहमति बनी, तो 15 फरवरी के बाद कभी भी विशेष सत्र आयोजित किया जा सकता है। इसके बाद ही विधानसभा का बजट सत्र बुलाया जाएगा।

16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के बाद पेश हुए केंद्रीय बजट में आरडीजी का प्रावधान खत्म किए जाने से राज्य सरकार को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। लंबे समय से हिमाचल प्रदेश अपने बढ़ते राजस्व घाटे की भरपाई इसी अनुदान के जरिए करता रहा है। पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत प्रदेश को वर्ष 2021 से 2026 के बीच कुल करीब 37,199 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला था।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में हिमाचल को 10,249 करोड़ रुपये, 2022-23 में 9,377 करोड़ रुपये, 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये और 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये की राशि मिली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 31 मार्च तक केवल 3,257 करोड़ रुपये ही मिल पाएंगे। इसके बाद यह अनुदान पूरी तरह बंद हो जाएगा।

एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि आरडीजी बंद होने के बाद उत्पन्न वित्तीय स्थिति पर विधानसभा में चर्चा कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान बंद कर हिमाचल के हितों की अनदेखी की है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि इस गंभीर मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर चर्चा करें, इसलिए विशेष सत्र बुलाने की मंशा है। आठ फरवरी की कैबिनेट बैठक में ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

बजट का आकार घटने की आशंका
आरडीजी बंद होने से चालू वित्त वर्ष की तुलना में प्रदेश के वार्षिक परिव्यय का आकार घट सकता है। छह और सात फरवरी से शुरू होने वाली विधायक प्राथमिकता बैठकों में इस पर स्थिति स्पष्ट होगी। इसका सीधा असर आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर पड़ सकता है। राजस्व घाटा नियंत्रण में रखने के लिए बजट का आकार कम करना पड़ सकता है, जिससे विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध धनराशि सीमित हो जाएगी। वर्तमान में प्रदेश के बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन, ऋण और ब्याज भुगतान पर खर्च होता है, जिससे विकास कार्यों के लिए गुंजाइश पहले से ही कम है।

बगैर दावे की राशि ट्रेजरी में जमा कराने के निर्देश
वित्तीय स्थिति सुधारने के प्रयासों के तहत हिमाचल प्रदेश के वित्त विभाग ने सभी बैंकों के स्टेट हेड को निर्देश दिए हैं कि निष्क्रिय सरकारी खातों और आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईएफ) में पड़ी बगैर दावे की सरकारी राशि तुरंत राज्य के ट्रेजरी हेड में स्थानांतरित की जाए। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम बजटिंग, लेखांकन और ऑडिटिंग को सुव्यवस्थित रखने के लिए उठाया गया है। यदि बाद में कोई राशि गलत तरीके से ट्रांसफर पाई जाती है, तो उसे वापस करने का आश्वासन भी दिया गया है।