चंडीगढ़ में डबल वोटिंग पर सख्ती: बाहरी राज्यों से जुड़े मतदाताओं की जांच तेज, 1000+ नाम दो जगह दर्ज

चंडीगढ़, 4 फरवरी 2026 Fact Recorder

Chandigarh Desk:  मतदाता सूची को दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के लिए चंडीगढ़ चुनाव विभाग ने दोहरे मतदाताओं के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से पहले चल रही प्री-मैपिंग प्रक्रिया के दौरान अब तक एक हजार से अधिक ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनके नाम चंडीगढ़ के साथ-साथ उनके मूल राज्यों की वोटर लिस्ट में भी दर्ज हैं। इनमें से करीब 600 मतदाता एक ही डिविजन से पाए गए हैं, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

चुनाव विभाग के अनुसार, प्री-मैपिंग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस प्रक्रिया में विशेष रूप से उन मतदाताओं की पहचान की जा रही है, जो अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के मूल निवासी हैं लेकिन वर्तमान में चंडीगढ़ में रह रहे हैं। जिन लोगों के नाम दो जगह दर्ज पाए जा रहे हैं या जो अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं मिल रहे, उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

मैसेज के जरिए दी जा रही सूचना
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनाव विभाग ने एक नई व्यवस्था लागू की है। जिन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, उन्हें उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जा रही है, ताकि वे समय रहते आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।

एसआईआर से पहले तेज हुई जांच
मंगलवार तक 54.07 प्रतिशत ऐसे मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है, जो वर्ष 2002 में स्वयं मतदाता थे या जिनके माता-पिता उस समय वोटर लिस्ट में शामिल थे। अब फोकस उन लोगों पर है, जो बाहर के राज्यों से आकर चंडीगढ़ में बसे हैं। कुछ इलाकों से शिकायतें मिली थीं कि एक ही मकान में 100 से अधिक मतदाता दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि कई लोगों के वोट पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी बने हुए हैं।

2002 की वोटर लिस्ट बनी आधार
मौजूदा प्रक्रिया में वर्ष 2002 में हुई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को आधार बनाया गया है। जिन मतदाताओं के नाम उस समय सूची में थे और बाद में चंडीगढ़ में नया वोट बनवाया गया, उनकी विशेष जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पिछले दो दशकों में जनसंख्या में बड़े बदलाव के कारण मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी प्रविष्टियों की समस्या बढ़ी है, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से दूर किया जा रहा है।

चुनाव विभाग ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष चुनाव और सही मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा।