04 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: यूरोपियन यूनियन के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद अब अमेरिका से हुआ करार भारत की आर्थिक दिशा और रफ्तार को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौतों के बाद भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति का स्पष्ट संदेश दिया है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता न सिर्फ निर्यात और निवेश बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
कभी भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख अब बदला नजर आ रहा है। विशाल उपभोक्ता बाजार, तेज आर्थिक वृद्धि और रणनीतिक साझेदारी के चलते अमेरिका के लिए भारत को नजरअंदाज करना संभव नहीं था। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच इस बहुप्रतीक्षित समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है।
श्रम-प्रधान उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ
इस करार से कपड़ा, परिधान, चमड़ा व गैर-चमड़े के जूते, रत्न-आभूषण, कालीन और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण इन क्षेत्रों का निर्यात प्रभावित हो रहा था। टैरिफ में नरमी से भारत कपड़ा, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण और झींगा जैसे उत्पादों के मामले में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ अधिक प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ सकेगा।
व्यापार आंकड़े क्या कहते हैं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर के बीच अमेरिका को भारत के निर्यात में सालाना आधार पर 15.9% की बढ़ोतरी हुई और यह 85.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, आयात 46.1 अरब डॉलर रहा। अमेरिकी अनुमानों के मुताबिक, 2024 में भारत-अमेरिका के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 212.3 अरब डॉलर रहा, जिसमें वस्तुओं के व्यापार में अमेरिका को 45.8 अरब डॉलर का घाटा और सेवाओं में मामूली अधिशेष मिला।
भारत किन चीजों की खरीद बढ़ाएगा
समझौते के तहत भारत अमेरिका से पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उत्पाद और विमानों की खरीद बढ़ा सकता है। इसके अलावा, कुछ चयनित कृषि उत्पादों के लिए भी बाजार पहुंच मिलने की संभावना है, बशर्ते इससे भारतीय किसानों को नुकसान न हो। गौरतलब है कि 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर रहा था।
तेल आयात और रूस पर निर्भरता
इस करार का असर भारत की तेल खरीद रणनीति पर भी दिख सकता है। भारत अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ा सकता है, जबकि रूस से खरीद में धीरे-धीरे कमी लाई जा रही है। हालांकि, मौजूदा रूसी अनुबंधों से बाहर निकलने में समय लगेगा और फिलहाल सरकार ने इस पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है।
किन सेक्टरों पर बना रहेगा शुल्क दबाव
हालांकि पारस्परिक टैरिफ में कमी की बात कही गई है, लेकिन इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसी कुछ वस्तुओं पर अमेरिका धारा 232 के तहत शुल्क जारी रख सकता है। ऐसे में समझौते के बावजूद कुछ भारतीय निर्यातों पर ऊंचा शुल्क बना रह सकता है या चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा।
2024 में व्यापार में किसका रहा दबदबा
2024 में भारत के अमेरिका को प्रमुख निर्यातों में दवाएं और जैविक उत्पाद, दूरसंचार उपकरण, कीमती व अर्ध-कीमती पत्थर, पेट्रोलियम उत्पाद, वाहन और ऑटो पुर्जे, आभूषण, सूती कपड़े और लोहा-इस्पात उत्पाद शामिल रहे।
वहीं, आयात में कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, हीरे, इलेक्ट्रिक मशीनरी, विमान और सोना प्रमुख रहे। इसके अलावा, सेवाओं के क्षेत्र में कंप्यूटर और सूचना सेवाओं के साथ-साथ बिजनेस मैनेजमेंट व कंसल्टेंसी सेवाओं का बड़ा योगदान रहा।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, अमेरिका के साथ यह व्यापार समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को निर्यात, निवेश और रोजगार के मोर्चे पर मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। अगर वैश्विक हालात अनुकूल रहे, तो यह करार आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक तस्वीर को काफी हद तक बदल सकता है।













