युवाओं के लिए बड़ा खतरा बनता कैंसर: 45 साल से कम उम्र में तेजी से बढ़ रहे मामले, दिल्ली की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

03 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से युवाओं के लिए भी जानलेवा खतरा बनता जा रहा है। वर्ल्ड कैंसर डे 2026 के मौके पर सामने आई दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट ने इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली हर तीन में से एक मौत 44 साल से कम उम्र के लोगों में दर्ज की गई है, जो बेहद चिंताजनक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक कैंसर दुनिया भर में मौतों का एक बड़ा कारण है। साल 2020 में करीब एक करोड़ लोगों की मौत कैंसर से हुई थी, यानी हर छह मौतों में से एक मौत कैंसर के कारण हुई। ब्रेस्ट, फेफड़े, कोलन, रेक्टम और प्रोस्टेट कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक-दो दशकों में कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों में जिस तेजी से बढ़ोतरी हुई है, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

इसी बीच दिल्ली की रिपोर्ट हालात को और गंभीर बनाती है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में कैंसर से हुई कुल मौतों में से करीब 33 प्रतिशत मौतें 44 साल से कम उम्र के लोगों की थीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके पीछे देर से बीमारी का पता चलना, स्क्रीनिंग की कमी, तंबाकू और शराब की बढ़ती आदत, प्रदूषण, तनाव और अस्वस्थ जीवनशैली को प्रमुख कारण मानते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से 1.1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जहां साल 2005 में करीब 2,000 लोगों की जान गई थी, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 7,400 हो गई। साल 2011 में कैंसर से करीब 10,000 मौतें दर्ज की गई थीं, जिनमें बड़ी संख्या 45 से 64 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की थी। इसके अलावा बच्चों और युवाओं में भी कैंसर से मौत के मामले सामने आए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतें हर साल औसतन करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं, जो जनसंख्या वृद्धि से कहीं अधिक है। कैंसर से होने वाली 90 प्रतिशत से ज्यादा मौतें अस्पतालों में दर्ज की गईं, जिससे यह संकेत मिलता है कि बीमारी के गंभीर होने पर ही अधिकतर लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं।

डेटा विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि पुरुषों में कैंसर से मौतों का आंकड़ा महिलाओं की तुलना में अधिक है। महिलाओं में ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट, सांस की नली, मुंह और गले के कैंसर से मौतें अधिक हो रही हैं। खासतौर पर 25 से 44 साल की उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर मौत का बड़ा कारण बन रहे हैं।

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में कैंसर से होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह बीमारी का देर से पता चलना है। शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, यह सोचकर कि इतनी कम उम्र में कैंसर नहीं हो सकता। नतीजतन, बीमारी का पता तब चलता है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है, जिससे इलाज की सफलता की संभावना कम हो जाती है।

डॉक्टरों का मानना है कि समय रहते जांच, नियमित स्क्रीनिंग, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर से होने वाली समयपूर्व मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसी दिशा में विशेषज्ञ युवाओं से सतर्क रहने और शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करने की अपील कर रहे हैं।