पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन में करोड़ों का ज़मीन घोटाला: प्रेसिडेंट-ट्रेजरर पर गंभीर आरोप, लोकपाल के पास शिकायत

31 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Punjab Desk: मोहाली स्थित पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन एक बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपों को लेकर विवादों में घिर गया है। पीसीए के लाइफ मेंबर और पूर्व रणजी खिलाड़ी राकेश हांडा ने लोकपाल-कम-एथिक्स ऑफिसर जस्टिस जसपाल सिंह (रिटायर्ड) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में पीसीए के मौजूदा प्रेसिडेंट अमरजीत मेहता, ट्रेजरर सुनील गुप्ता और एक निजी कंसल्टेंसी फर्म पर बठिंडा में रीजनल सेंटर के लिए खरीदी गई ज़मीन में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है।

शिकायत के अनुसार, बठिंडा में पीसीए कार्यालय/रीजनल सेंटर के लिए ज़मीन मार्केट रेट और कलेक्टर रेट से कहीं अधिक कीमत पर खरीदी गई। आरोप है कि महज़ 10 दिनों के भीतर एक ही व्यक्ति के माध्यम से दो अलग-अलग सेल डीड कराई गईं—एक रजिस्ट्री पीसीए के नाम अत्यधिक कीमत पर, जबकि दूसरी कलेक्टर रेट के करीब। हैरानी की बात यह है कि दोनों ज़मीनें एक ही खसरा (मस्टिल नंबर 152 और 128) का हिस्सा बताई गई हैं।

शिकायत में पीसीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया गया कि 8 फरवरी 2024 को अमृतसर और बठिंडा में रीजनल सेंटर बनाने के लिए गठित सब-कमेटी में प्रेसिडेंट अमरजीत मेहता और ट्रेजरर सुनील गुप्ता शामिल थे। इसी कमेटी ने कथित तौर पर नियमों की अनदेखी करते हुए “मेसर्स एमजीएसजी एंड एसोसिएट्स” को कंसल्टेंट नियुक्त किया। आरोप है कि यह फर्म भूमि जांच का तकनीकी अनुभव नहीं रखती और इसकी नियुक्ति के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन या पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

शिकायतकर्ता का दावा है कि कंसल्टेंसी की रिपोर्ट के बावजूद ज़मीन चयन और कीमत तय करने का पूरा नियंत्रण प्रेसिडेंट ने अपने हाथ में ले लिया। 15 अक्टूबर 2024 की बैठक में बठिंडा-मुक्तसर हाईवे की एक ज़मीन के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का बजट पास किया गया। आरोप है कि एक ही दिन एक ही विक्रेता से आठ अलग-अलग ड्राफ्ट बनवाकर रजिस्ट्री कराई गई, जबकि सामान्यतः एक ड्राफ्ट पर्याप्त होता है। साथ ही, कुछ हिस्सों का कलेक्टर रेट 20–23 लाख रुपये प्रति किला होने के बावजूद पूरी ज़मीन का कलेक्टर रेट 40 लाख रुपये प्रति किला दिखाया गया।

राकेश हांडा ने अपनी शिकायत में मांग की है कि—

  • आरोपित अधिकारियों को पीसीए की सदस्यता से स्थायी रूप से बर्खास्त किया जाए।

  • कथित घोटाले से गबन की गई राशि की वसूली की जाए।

  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मामला लोकपाल के समक्ष विचाराधीन है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।