29 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: यूनियन बजट 2026 से पहले मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार आम बजट पेश करेंगी और इस बार पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। खबरों के मुताबिक, सरकार टैक्स सेविंग के सबसे लोकप्रिय सेक्शन 80C की सीमा को मौजूदा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर सकती है, जिससे करोड़ों टैक्सपेयर्स की जेब पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा।
बजट से पहले अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने वित्त मंत्रालय को सुझाव दिया है कि टैक्स-सेविंग निवेश पर मिलने वाली छूट की सीमा में बढ़ोतरी की जाए। फिलहाल सेक्शन 80C के तहत एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही टैक्स छूट मिलती है, जो खासतौर पर पुरानी टैक्स व्यवस्था अपनाने वालों के लिए अहम है। यदि सरकार इस सिफारिश को स्वीकार करती है, तो यह मिडिल क्लास के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं होगा।
इस मांग के पीछे सबसे बड़ा तर्क यह है कि 80C की सीमा साल 2014 में तय की गई थी और तब से अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। बीते एक दशक में महंगाई, जीवन-यापन की लागत और आमदनी तीनों में इजाफा हुआ है, लेकिन टैक्स छूट की सीमा जस की तस बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह सीमा बढ़ाना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि करदाताओं के साथ न्याय भी होगा।
सेक्शन 80C के तहत पीपीएफ, ईएलएसएस म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा प्रीमियम, सुकन्या समृद्धि योजना, बच्चों की स्कूल ट्यूशन फीस और होम लोन के प्रिंसिपल जैसी कई सेविंग्स शामिल हैं। यदि इसकी लिमिट बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दी जाती है, तो इससे लोगों को ज्यादा निवेश करने और लंबी अवधि की बचत योजनाओं को अपनाने का प्रोत्साहन मिलेगा। इसका फायदा न केवल टैक्स बचत के रूप में मिलेगा, बल्कि रिटायरमेंट और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।













