पाकिस्तान की राह पर बांग्लादेश? सेना में शुरू हुआ इस्लामिक इंस्टीट्यूट, सैनिकों को दी जाएगी धार्मिक ट्रेनिंग

21 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  बांग्लादेश की सेना में पहली बार धर्म आधारित प्रशिक्षण की औपचारिक शुरुआत की गई है। सेना के भीतर एक विशेष यूनिट के तहत इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है, जिसकी आधारशिला 20 जनवरी को सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने रखी। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य सैनिकों को धार्मिक रूप से प्रशिक्षित करना बताया जा रहा है। वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्थापना के बाद यह पहली बार है जब सेना के भीतर इस तरह की धार्मिक इकाई बनाई गई है, जिसे लेकर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार यह इस्लामिक इंस्टीट्यूट ढाका के पूर्वांचल क्षेत्र के जलसिरी में स्थापित किया गया है और इसे राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ा गया है। हाल ही में बांग्लादेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत इस संस्थान को भी शामिल किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बांग्लादेश की सेना की विचारधारा में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की सेना में करीब 1.70 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि अर्द्धसैनिक बलों में लगभग 6.80 लाख जवान शामिल हैं। यह सेना दक्षिण एशिया की चौथी सबसे बड़ी सेना मानी जाती है। सैन्य ताकत की बात करें तो बांग्लादेश के पास 42 लड़ाकू विमान और 65 हेलिकॉप्टर हैं, साथ ही हाल के समय में उसने चीन से नए फाइटर जेट खरीदने में भी रुचि दिखाई है।

राजनीतिक और सैन्य विश्लेषकों के अनुसार अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश की सेना का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ा है। नवंबर 2025 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें ट्रेनिंग और रक्षा उत्पादन को लेकर सहमति बनी थी। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश को एक रणनीतिक प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बने बांग्लादेश में शुरुआत से ही सेना को धर्मनिरपेक्ष रखने की नीति अपनाई गई थी, जिसमें भारत की अहम भूमिका रही थी। ऐसे में सेना के भीतर इस्लामिक इंस्टीट्यूट की स्थापना को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।