चंडीगढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन: साइबर ठगों को कमीशन पर बैंक खाते देने वाले 9 युवक गिरफ्तार, ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ में बड़ी सफलता

19 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Chandigarh Desk:  डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर नकेल कसते हुए चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत 9 ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगों को अपने बैंक खाते किराये पर देकर ठगी की रकम के लेन-देन में मदद कर रहे थे। बदले में इन्हें मोटा कमीशन दिया जाता था।

चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, साइबर ठग ठगी की रकम को छिपाने और निकालने के लिए दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। इसी नेटवर्क का हिस्सा बनकर ये आरोपी अपने खाते ठगों को उपलब्ध करवा रहे थे। गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों में से 7 चंडीगढ़ और 2 मोहाली के रहने वाले हैं। सभी की उम्र 20 से 26 वर्ष के बीच है।

एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाना पुलिस ने संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए यह गिरफ्तारी की है। जांच में सामने आया कि आरोपियों के बैंक खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी, जिसे बाद में कमीशन काटकर साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था। यह पूरा नेटवर्क लेयरिंग और अवैध निकासी में शामिल था।

पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध बैंक अकाउंट्स चंडीगढ़ से ही ऑपरेट हो रहे हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा है। लंबे समय से निगरानी के बाद ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत कार्रवाई की गई और आरोपियों को दबोचा गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मौलीजागरा निवासी 22 वर्षीय रितिक, 20 वर्षीय रिथम, मोहाली निवासी 25 वर्षीय आकाश, मौलीजागरा निवासी 22 वर्षीय मोहम्मद दानिश, सेक्टर-41 निवासी 25 वर्षीय अर्चित, सेक्टर-25 निवासी 20 वर्षीय चरणदास, सेक्टर-45 बुड़ैल निवासी 26 वर्षीय मोहम्मद तोशिक, गांव फेदा निजामपुर निवासी 21 वर्षीय दिलप्रीत और मोहाली निवासी 23 वर्षीय अंकित के रूप में हुई है। इनमें से रितिक, मोहम्मद दानिश, मोहम्मद तोशिक और अंकित के खिलाफ पहले से भी एक-एक मामला दर्ज पाया गया है।

साइबर पुलिस की लोगों से अपील:
चंडीगढ़ पुलिस की साइबर टीम ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ईमेल या वेबसाइट पर भरोसा न करें। ओटीपी, बैंक डिटेल्स या निजी दस्तावेज किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।