19 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: योग गुरु बाबा रामदेव ने एक बार फिर योग और खान-पान के ज़रिए सेहत बेहतर रखने की बात कही है। हाल ही में उन्होंने टाइप-1 डायबिटीज को लेकर कुछ उपाय बताए हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि इनसे ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मेडिकल एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है और इसे पूरी तरह “रिवर्स” करना फिलहाल संभव नहीं है।
क्या है टाइप-1 डायबिटीज?
टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज़ की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यह बीमारी ज़्यादातर बच्चों और युवाओं में पाई जाती है और इसमें इंसुलिन थेरेपी जीवनभर जरूरी होती है।
इसके आम लक्षणों में अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, वजन कम होना और धुंधला दिखना शामिल हैं।
बाबा रामदेव के क्या दावे हैं?
बाबा रामदेव का कहना है कि जीवनशैली में बदलाव, योग और प्राकृतिक आहार से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। उनके अनुसार, गलत खान-पान, पॉल्यूशन और अनहेल्दी लाइफस्टाइल से डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
खाने-पीने को लेकर क्या सलाह दी?
उनके अनुसार, डाइट में सब्जियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वे करेला, खीरा, टमाटर, लौकी, भिंडी, पालक, बीन्स जैसी सब्जियों को शामिल करने की बात कहते हैं। साथ ही, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी और हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों से दूरी रखने की सलाह देते हैं।
योग और थेरेपी को लेकर दावा
बाबा रामदेव कुछ योगासनों—जैसे मंडूकासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन और वक्रासन—को रोज़ाना करने की बात कहते हैं। उनका दावा है कि इससे पाचन और मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है। उन्होंने नीम और करेला से जुड़ी एक वैकल्पिक थेरेपी का भी ज़िक्र किया है।
डॉक्टर क्या कहते हैं? (ज़रूरी जानकारी)
मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक:
टाइप-1 डायबिटीज को योग या डाइट से रिवर्स नहीं किया जा सकता
योग और संतुलित आहार से ब्लड शुगर कंट्रोल, फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है
लेकिन इंसुलिन लेना बंद करना खतरनाक हो सकता है
किसी भी वैकल्पिक उपाय को अपनाने से पहले एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से सलाह जरूरी है
निष्कर्ष
योग और हेल्दी लाइफस्टाइल हर उम्र के लिए फायदेमंद हैं और डायबिटीज मैनेजमेंट में सहायक भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन टाइप-1 डायबिटीज के मामले में इन्हें मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक माना जाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर जागरूकता के उद्देश्य से है। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या इंसुलिन बंद न करें।













