19 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 19 जनवरी 2026 को भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान-अमेरिका टकराव, गाजा संकट और यमन में सऊदी अरब व UAE के बीच मतभेदों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि खाड़ी क्षेत्र के दो सबसे ताकतवर देशों—सऊदी अरब और UAE—में भारत के लिए कौन ज्यादा महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति बनने के बाद यह शेख मोहम्मद बिन जायद की भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा होगी, जबकि पिछले एक दशक में यह उनकी पांचवीं भारत यात्रा है। UAE नेताओं की भारत यात्राएं भले ही नियमित रही हों, लेकिन मौजूदा हालात में यह दौरा रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, खासकर सऊदी अरब–पाकिस्तान के बढ़ते सुरक्षा सहयोग और हालिया UAE-सऊदी तनाव के बीच।
UAE के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी
भारत और UAE के रिश्ते बीते कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। 2022 में दोनों देशों के बीच हुए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के बाद व्यापार और निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। UAE आज भारत का रणनीतिक साझेदार है, जहां व्यापार, निवेश, ऊर्जा और राजनीतिक सहयोग के कई मजबूत स्तंभ मौजूद हैं।
CEPA के बाद भारत-UAE द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का भी बड़ा स्रोत है। इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और एनर्जी सेक्टर में UAE ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसके अलावा UPI और RuPay जैसे भारतीय पेमेंट सिस्टम का UAE में स्वीकार होना भी रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।
सुरक्षा और रक्षा के मोर्चे पर भी दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए हैं। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज, रक्षा तकनीक में सहयोग, UAVs, AI और साइबर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी भारत-UAE संबंधों को नई ऊंचाई दे रही है।
सऊदी अरब: ऊर्जा और रणनीतिक प्रभाव का केंद्र
वहीं सऊदी अरब भारत के लिए मध्य पूर्व का एक और बेहद अहम देश है। सऊदी न सिर्फ भारत का बड़ा तेल और LPG सप्लायर है, बल्कि वहां भारतीयों का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय भी रहता है। इसके अलावा मुस्लिम देशों में सऊदी अरब की अगुवाई और GCC व OIC जैसे संगठनों में उसकी भूमिका भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
भारत और सऊदी अरब के बीच सालाना व्यापार 40 अरब डॉलर से अधिक का है। सऊदी अरब भारत को ऊर्जा उपलब्ध कराता है, जबकि भारत सऊदी को सर्विसेज, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग देता है। सऊदी का सॉवरेन वेल्थ फंड PIF भारत की कई बड़ी कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहा है।
सुरक्षा सहयोग के तहत दोनों देशों के बीच जॉइंट सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर भी बातचीत चल रही है। टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर में भी भारत-सऊदी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
आखिर भारत के लिए कौन ज्यादा अहम?
असल में भारत के लिए UAE और सऊदी अरब में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है। UAE भारत का सबसे करीबी आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है, जबकि सऊदी अरब ऊर्जा सुरक्षा और पूरे इस्लामिक विश्व में प्रभाव के लिहाज से बेहद जरूरी है। बदलते भू-राजनीतिक हालात में भारत दोनों देशों के साथ संतुलन बनाकर चल रहा है, ताकि मिडिल ईस्ट में उसकी रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सके।











