रुपए में ‘महा-संकट’ जारी: डॉलर के मुकाबले गिरावट 4 हफ्तों के लोअर लेवल पर, जल्द आ सकती है ऐतिहासिक गिरावट

17 January 2026 Fact Recorder

Business Desk:  रुपया लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट के दबाव में है और डॉलर के मुकाबले 61 पैसे तक कमजोर हुआ है। जानकारों का कहना है कि अगर आरबीआई समय पर हस्तक्षेप नहीं करता है, तो सोमवार को रुपया अपने ऐतिहासिक लोअर लेवल 91.20–91.25 तक जा सकता है।

फिलहाल, रुपए का यह हाल चार हफ्तों के लोअर लेवल पर है, जबकि डॉलर अपने छह हफ्तों के उच्चतम स्तर पर मजबूत हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, रुपए में लगातार गिरावट का मुख्य कारण है विदेशी निवेशकों की निकासी, डॉलर की बढ़ती मांग और अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में अनिश्चितता

रुपए की गिरावट के प्रमुख कारण:

  1. ट्रेड डील ना होना:
    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। अमेरिकी राजदूत ने बातचीत जारी रहने की बात कही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस रिजल्ट नहीं आया।

  2. डॉलर की डिमांड:
    डॉलर की बढ़ती मांग और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के चलते स्थानीय कारोबारी डॉलर खरीद रहे हैं, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है।

  3. विदेशी निवेशकों की निकासी:
    जनवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 22,530 करोड़ रुपए की निकासी की है। केवल शुक्रवार को ही 4,346 करोड़ रुपए का मुनाफा बाहर गया।

  4. शेयर बाजार में दबाव:
    जनवरी में सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 2% की गिरावट देखी गई, जो रुपए पर भी दबाव डाल रही है।

  5. डॉलर इंडेक्स में तेजी:
    डॉलर इंडेक्स 6 हफ्तों के हाई पर पहुंच चुका है, वर्तमान में 99.38 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

  6. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:
    ईरान और खाड़ी देशों के तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। इससे रुपए पर अतिरिक्त दबाव बना है।

जानकार क्या कह रहे हैं?

अनुज चौधरी (मिराए एसेट शेयरखान):
विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूती से रुपए में गिरावट जारी रह सकती है। उनका अनुमान है कि डॉलर के मुकाबले रुपए का हाजिर भाव 90.50 से 91.25 के बीच रह सकता है

दिलीप परमार (एचडीएफसी सिक्योरिटीज):
रुपए का कमजोर प्रदर्शन डॉलर की हाई डिमांड और विदेशी निवेश की कमी के कारण है। अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और आरबीआई की तकनीकी फॉरेक्स बिड्स ने भी कमजोरी को बढ़ाया है।

नतीजा:

रुपए की गिरावट के चलते निवेशकों और आम कारोबारियों दोनों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। अगर डॉलर की मजबूती और विदेशी निकासी जारी रहती है, तो रुपया जल्द ही 91 के पार जा सकता है।