प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय लोकतंत्र की मजबूती और अध्यक्षों की भूमिका को बताया अहम

16 January 2026  Fact Recorder

National Desk:  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि धैर्य उनकी सबसे बड़ी विशेषता होती है। वे शोर-शराबा करने वाले और अति उत्साही सदस्यों को भी सहजता और मुस्कान के साथ संभाल लेते हैं।

राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक और संसदीय यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में जनता सर्वोपरि है और सरकार ने जनता की आकांक्षाओं व सपनों को प्राथमिकता दी है। जनता के मार्ग में कोई बाधा न आए, इसके लिए प्रक्रिया से लेकर प्रौद्योगिकी तक हर क्षेत्र में लोकतंत्रीकरण किया गया है। लोकतांत्रिक भावना भारत की रगों, सोच और संस्कारों में रची-बसी है।

तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने संविधान सदन के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यही वह स्थान है, जहां आजादी के बाद भारत के संविधान का निर्माण हुआ था। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उस समय यह आशंका जताई गई थी कि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र सफल नहीं हो पाएगा, लेकिन भारत ने विविधता को ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बना दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ अंतिम व्यक्ति तक विकास और सेवाओं की पहुंच है। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। जनकल्याण और मानवता की सेवा भारतीय लोकतंत्र के मूल संस्कार हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था। करीब 98 करोड़ नागरिकों ने मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया, 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दल चुनावी मैदान में थे। इन चुनावों में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली।

उन्होंने ग्लोबल साउथ पर भी अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक बदलावों के दौर में ग्लोबल साउथ के लिए नए रास्ते बनाने का यह सही समय है। भारत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठा रहा है। जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ओपन-सोर्स तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, ताकि ग्लोबल साउथ के देश भी भारत जैसी व्यवस्थाएं अपने यहां लागू कर सकें।

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सात दशकों से अधिक की संसदीय यात्रा में भारत का लोकतंत्र जनकेंद्रित नीतियों और कल्याणकारी कानूनों के माध्यम से मजबूत हुआ है। उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली को सहभागी लोकतंत्र की आधारशिला बताया। साथ ही कहा कि संसद और सरकार के संयुक्त प्रयासों से कई अप्रचलित कानूनों को समाप्त कर नए कल्याणकारी कानून लागू किए गए हैं, जो भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।