आदि शंकराचार्य ने भारत की ज्ञान परंपरा को दी वैश्विक पहचान: गुजराती ग्रंथावली विमोचन पर बोले अमित शाह

16 January 2026 Fact Recorder 

National Desk:  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने भारत की पहचान को सुदृढ़ किया और सनातन धर्म की ज्ञान परंपरा को देश की चारों दिशाओं में स्थापित किया। वे बृहस्पतिवार को गुजराती भाषा में प्रकाशित आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली के विमोचन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

अमित शाह ने कहा कि आठवीं सदी के महान अद्वैत वेदांताचार्य आदि शंकराचार्य ने अत्यंत कम आयु में असाधारण कार्य किए। उन्होंने पूरे भारत में पैदल यात्रा कर न केवल मठों की स्थापना की, बल्कि एक तरह से ‘चलती-फिरती विश्वविद्यालय’ की भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से भारत में ज्ञान, दर्शन और विचारों की एक सशक्त परंपरा विकसित हुई।

गृह मंत्री ने बताया कि शंकराचार्य की रचनाओं का 15 खंडों में प्रकाशित यह गुजराती संस्करण विशेष रूप से गुजरात के युवाओं को उनके विचारों, दर्शन और जीवन को समझने में मदद करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इन ग्रंथों के माध्यम से उस दौर के सामाजिक, धार्मिक और दार्शनिक प्रश्नों के तार्किक उत्तर आज की पीढ़ी तक पहुंचेंगे।

शाह ने कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ केवल धार्मिक केंद्र नहीं थे, बल्कि वे वेदों के संरक्षण, वितरण और अध्ययन के प्रमुख केंद्र बने। इन मठों के माध्यम से उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि भारत की ज्ञान परंपरा स्थायी रूप से संरक्षित रहे और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि उस समय बौद्ध, जैन, कपालिक और तांत्रिक परंपराओं के प्रभाव के बीच आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म से जुड़े सभी सवालों और शंकाओं का तार्किक और बौद्धिक उत्तर दिया। शंकराचार्य ने केवल दर्शन नहीं दिया, बल्कि भारत को विचारों का समन्वय, ज्ञान का स्वरूप और मोक्ष का मार्ग भी दिखाया।

अमित शाह के अनुसार, आदि शंकराचार्य का योगदान भारतीय सभ्यता और संस्कृति की आत्मा को समझने के लिए आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पहले था।