जनगणना 2027: पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक, 30 दिन में होगी घरों की लिस्टिंग और डेटा संग्रह

09 January 2026 Fact Recorder

National Desk:  केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जनगणना 2027 को लेकर अधिसूचना जारी करते हुए बताया है कि जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। इस चरण में देशभर के सभी घरों की लिस्टिंग की जाएगी और परिवारों से जुड़ा विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को यह कार्य 30 दिनों के भीतर पूरा करना होगा।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 1 अप्रैल से देश के सभी मकानों और परिवारों का विवरण जुटाया जाएगा, ताकि जनसंख्या गणना के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके। घरों की लिस्टिंग शुरू होने से लगभग 15 दिन पहले नागरिकों को सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्वयं जानकारी भरने का विकल्प भी दिया जाएगा।

गौरतलब है कि जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब यह प्रक्रिया 2027 में पूरी की जाएगी।

पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना 2027

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। लगभग 30 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे। मोबाइल एप, वेब पोर्टल और रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर के जरिए जनगणना प्रक्रिया लगभग पेपरलेस होगी।

ये ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। खास बात यह है कि इस बार जाति से संबंधित डेटा भी डिजिटल रूप से एकत्र किया जाएगा। आज़ादी के बाद यह पहली जनगणना होगी, जिसमें जाति आधारित गणना को शामिल किया जाएगा। इससे पहले आखिरी बार 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में जाति जनगणना हुई थी।

यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी द्वारा अप्रैल में लिया गया था। उल्लेखनीय है कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग 121 करोड़ थी, जिसमें 51.5 प्रतिशत पुरुष और 48.5 प्रतिशत महिलाएं थीं।

हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’, मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

1. आपदा प्रबंधन में सटीक राहत
जियो-टैगिंग से तैयार डिजिटल मैप बाढ़, भूकंप, बादल फटने जैसी आपदाओं में बेहद उपयोगी होगा। इससे तुरंत पता चल सकेगा कि प्रभावित क्षेत्र में कितने घर और कितने लोग हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

2. परिसीमन में मदद
संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में डिजिटल मैप सहायक होगा। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का संतुलित बंटवारा संभव होगा और समुदायों को अनावश्यक रूप से विभाजित होने से रोका जा सकेगा।

3. शहरी योजना को मिलेगी मजबूती
सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों की योजना बनाने में डिजिटल लेआउट मददगार होगा। जनसंख्या संरचना के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय की जा सकेगी।

4. शहरीकरण और पलायन का सटीक डेटा
आने वाली जनगणनाओं में डिजिटल मैप के जरिए शहरीकरण और पलायन की दर में हुए बदलावों का तुलनात्मक अध्ययन आसान हो जाएगा।

5. मतदाता सूची होगी अधिक सटीक
आधार से जुड़ी जियो-टैगिंग मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हटाने में मदद करेगी। इससे दोहरे पंजीकरण पर रोक लगेगी और वोटर डेटा अधिक मजबूत होगा।