HP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट में सरकार का जवाब: चुनाव कराने के लिए चाहिए कम से कम छह महीने का समय

03 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर कराने को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को करीब तीन घंटे तक विस्तृत सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायतों और जिला परिषदों के पुनर्सीमांकन से जुड़ी अधिसूचना को एक अन्य खंडपीठ ने रद्द कर दिया है और इस पर 10 जनवरी तक आपत्तियां मांगी गई हैं। ऐसे में नियमों के अनुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों में समय पर पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं है।

वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जिस पुनर्सीमांकन अधिसूचना को रद्द किया गया है, वह केवल जिला परिषद शिमला से संबंधित है और इसे आधार बनाकर पूरे प्रदेश में चुनाव टालना उचित नहीं है।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि जिला परिषद पुनर्सीमांकन से जुड़ी याचिका में चुनाव आयोग को पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए यह मामला उसी खंडपीठ को भेजा जाना चाहिए, जिसने पहले इस विषय पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने इसे एक संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में उसी पीठ द्वारा सुनवाई उचित होगी, जिसने देवेंद्र सिंह नेगी मामले में पुनर्सीमांकन की अधिसूचना को रद्द किया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो राज्य सरकार पंचायत चुनाव कराने में खुद को असहाय महसूस कर रही है। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 5 दिसंबर 2025 को एक अन्य खंडपीठ ने पंचायती राज अधिनियम में जिला परिषद और पंचायत समितियों के परिसीमन से जुड़े संशोधित नियम 9(2) को मनमाना, अतार्किक और संविधान के विरुद्ध बताते हुए खारिज कर दिया था।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ के समक्ष होगी, जहां पंचायत चुनाव से जुड़े विवाद पर आगे निर्णय लिया जाएगा।