असम में ‘जनता बनाम सत्ता’ की लड़ाई तय, CM हिमंत पर कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का तीखा हमला

03 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Politics Desk:  असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि आने वाला चुनाव किसी पार्टी के बीच नहीं, बल्कि जनता और शासक के बीच की सीधी लड़ाई होगा।

डिब्रूगढ़ जिला नागरिक मंच द्वारा आयोजित ‘गण अभिबर्थन’ (जन सम्मेलन) को संबोधित करते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे अहम आधार सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, जिसे मौजूदा सरकार कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को केवल वोट देने का नहीं, बल्कि सरकार की आलोचना करने का भी अधिकार देता है।

गोगोई ने आरोप लगाया कि बीजेपी की राजनीति पुराने राजाओं जैसी हो गई है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में एक महाराजा बैठा है और जहां-जहां बीजेपी की सरकार है, वहां एक-एक राजा बैठा दिया गया है। जनता को सशक्त करने की बजाय डर और दबाव से सरकार चलाई जा रही है।”

कांग्रेस नेता ने सरकारी योजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कल्याणकारी योजनाएं सरकार का कर्तव्य होती हैं, लेकिन अब इनके साथ शर्तें जोड़ी जा रही हैं। “अगर आप लाभ लेना चाहते हैं, तो आप सवाल नहीं पूछ सकते, आलोचना नहीं कर सकते और दूसरी पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते। यही इस सरकार का अहंकार है,” उन्होंने कहा।

बीजेपी पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए गोगोई ने कहा कि जब भी लोग एकजुट होने की कोशिश करते हैं, सरकार कभी धर्म, कभी भाषा और कभी क्षेत्रीय पहचान के नाम पर फूट डालने लगती है। अपर असम-लोअर असम, बोडो-गैर बोडो और अन्य सामाजिक विभाजनों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे सत्ता बचाने की साजिश बताया।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर सीधा हमला करते हुए गोगोई ने कहा कि जहां असम को विकास और कल्याण के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में होना चाहिए था, वहीं आज यह पिछड़े राज्यों की श्रेणी में आ गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्रियों में शामिल हो चुके हैं।

आगामी चुनावों को लेकर गोगोई ने कहा कि विपक्षी दलों के बीच गठबंधन तय है और सभी को एकजुट होकर जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा, “यह चुनाव पार्टी बनाम पार्टी नहीं है, बल्कि असम के लोगों और सत्ता के बीच का चुनाव है।”

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