01 January 2026 Fact Recorder
Rashifal Desk: पंचांग के अनुसार आज 1 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन है और पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो रात्रि 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। आज गुरु प्रदोष व्रत रखा जा रहा है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। नए साल के पहले दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग।
आज का पंचांग
तिथि: शुक्ल त्रयोदशी (रात्रि 10:22 बजे तक)
मास (पूर्णिमांत): पौष
दिन: गुरुवार
संवत: 2082
योग और करण
योग: शुभ – सायं 05:12 बजे तक
करण: कौलव – दोपहर 12:05 बजे तक
करण: तैतिल – रात्रि 10:22 बजे तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
सूर्योदय: प्रातः 07:14 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:35 बजे
चंद्रोदय: दोपहर 03:14 बजे
चंद्रास्त: 02 जनवरी को प्रातः 06:07 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:45 बजे तक
अमृत काल: सायं 07:57 से रात्रि 09:23 बजे तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01:42 से 03:00 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 09:49 से 11:07 बजे तक
यमगण्ड: प्रातः 07:14 से 08:32 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
रोहिणी नक्षत्र: रात्रि 10:48 बजे तक
नक्षत्र स्वामी: चंद्र देव
राशि स्वामी: शुक्र देव
देवता: ब्रह्मा या प्रजापति
प्रतीक: गाड़ी का पहिया
रोहिणी नक्षत्र के जातक कला प्रेमी, रचनात्मक, व्यावहारिक और उदार स्वभाव के माने जाते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष आराधना का पर्व है। यह व्रत गुरुवार के दिन त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से ज्ञान, भाग्य और आर्थिक स्थिरता में वृद्धि होती है। बृहस्पति ग्रह की कृपा से जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। संध्या काल में प्रदोष समय के दौरान शिव पूजन विशेष फलदायी माना गया है।
गुरु प्रदोष व्रत विधि
प्रातः स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास या सात्विक भोजन करें।
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
बेलपत्र, पीले पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें।
प्रदोष काल में शिव मंत्रों का जाप और व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में शिव आरती कर मनोकामना प्रार्थना करें।
अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।













