वैश्विक सुस्ती के दौर में भारत की उपलब्धि: 2025 में घरेलू मजबूती के दम पर बना दुनिया का चमकता सितारा

31 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Business Desk:  साल 2025 वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियों और अनिश्चितताओं से भरा रहा, लेकिन भारत ने इस कठिन दौर में खुद को एक मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया। अमेरिका और यूरोप में ऊंची ब्याज दरें, कमजोर उपभोक्ता मांग और व्यापारिक तनावों के बीच भारत ने तेज आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित महंगाई और मजबूत घरेलू मांग के सहारे दुनिया में “ब्राइट स्पॉट” का दर्जा हासिल किया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आकलनों के अनुसार, 2025 में भारत की आर्थिक सफलता की नींव बाहरी परिस्थितियों से ज्यादा उसकी आंतरिक संरचनात्मक मजबूती रही। IMF के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक 2025 के मुताबिक, भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर करीब 6.8 फीसदी रही, जो वैश्विक औसत 3.2 फीसदी से कहीं अधिक है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अग्रिम अनुमानों में सेवा क्षेत्र, निर्माण और सार्वजनिक निवेश को विकास का प्रमुख आधार बताया गया है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग ने निर्यात और वैश्विक व्यापार में आई सुस्ती के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया।

महंगाई और आरबीआई की भूमिका
2025 में भारत में खुदरा महंगाई औसतन 5.4 फीसदी रही, जो कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम थी। खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कोर महंगाई नियंत्रण में रही। इससे आरबीआई को मौद्रिक नीति में संतुलन बनाए रखने का अवसर मिला और उसने विकास को समर्थन देने के साथ सतर्क रुख अपनाया।

निवेश और रोजगार को मिला सहारा
केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च 2025 में जीडीपी के करीब 3.4 फीसदी तक पहुंच गया। सड़क, रेलवे, रक्षा उत्पादन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़े निवेश से मांग और रोजगार दोनों को मजबूती मिली। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक निवेश ने निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहित किया।

अमेरिकी टैरिफ का सीमित असर
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को 2025 का बड़ा बाहरी झटका माना गया, जिससे कुछ तिमाहियों में अमेरिका को निर्यात में 6–7 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, यूरोपीय संघ, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में बढ़े निर्यात ने इस नुकसान की भरपाई कर दी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अब इतनी विविध हो चुकी है कि किसी एक बाजार का झटका बड़ा संकट नहीं बन पाता।

2026 का परिदृश्य
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, 2026 भारत के लिए अवसरों और जोखिमों के बीच संतुलन का साल होगा। नीतिगत फैसलों, वैश्विक भू-आर्थिक बदलावों और घरेलू सुधारों की असली परीक्षा इसी वर्ष होगी। अनुमान है कि 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि 6.5 से 6.9 फीसदी के बीच रह सकती है और भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।