30 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: साल 2020 में भारत-चीन के बीच हुई गलवान घाटी की हिंसक झड़प एक बार फिर चर्चा में है। वजह है इस घटना पर आधारित सलमान खान की आने वाली फिल्म बैटल ऑफ गलवान, जिसका टीजर 27 दिसंबर को रिलीज हुआ। टीजर सामने आते ही चीन की प्रतिक्रिया भी तेज हो गई। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने फिल्म को “बिना तथ्यों पर आधारित” बताते हुए इसे महज मनोरंजन करार दिया है।
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि फिल्मों और कहानियों से जमीन पर कब्जा नहीं होता और ऐसी फिल्में दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दिलचस्प बात यह है कि चीन ने गलवान घाटी की झड़प को लेकर आज तक कोई विस्तृत और आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
भारत से ज्यादा नुकसान झेल चुका है चीन
द क्लैक्शन की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, गलवान घाटी की लड़ाई में चीन को भारत की तुलना में कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस झड़प में चीन के करीब 38 सैनिक मारे गए थे।
हालांकि चीन ने हमेशा इस दावे को नकारा और कहा कि उसके सिर्फ 4 सैनिक मारे गए थे, जबकि एक की मौत डूबने से हुई थी। यानी चीन ने कुल 5 सैनिकों के मारे जाने की बात मानी। इसके बाद भी चीन ने कभी इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत रिपोर्ट जारी नहीं की।
वहीं भारत ने इस झड़प में अपने 20 जवानों को खोया था, जिनमें कर्नल बी. संतोष बाबू भी शामिल थे। इसके अलावा 70 से अधिक भारतीय सैनिक घायल हुए थे।
गलवान घाटी में झड़प की असली वजह क्या थी?
गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प की मुख्य वजह चीन की ओर से समझौते का उल्लंघन बताया जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार जून 2020 की शुरुआत में चीन एलएसी के पास निर्माण कार्य कर रहा था। इसके जवाब में भारत ने गलवान क्षेत्र में एक अस्थायी पुल का निर्माण कराया।
इस पर चीनी सैनिकों ने विरोध जताया और 6 जून के आसपास दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई।
इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से यह सहमति बनी थी कि दोनों पक्ष सीमा पार नहीं करेंगे। लेकिन आरोप है कि 15 जून की रात चीन ने इस समझौते को तोड़ दिया, जिसके बाद दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ।
घात लगाकर किया गया हमला
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गलवान घाटी की झड़प के तीन दिन बाद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया था कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर घात लगाकर हमला किया। हमले में बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था।
बताया जाता है कि उस समय घाटी के पास कम से कम 150 चीनी सैनिक तैनात थे, जिन्होंने भारतीय जवानों को निशाना बनाया।
गलवान घाटी की यही सच्चाई आज भी चीन को असहज करती है और शायद यही वजह है कि इस घटना पर बनी फिल्म का नाम सुनते ही उसकी प्रतिक्रिया सामने आ जाती है।











