उत्तराखंड 27 Dec 2025 Fact Recorder
National Desk : थपलियाल नामक एक युवा की कहानी सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यह युवक ब्लिंकेट के लिए डिलीवरी करता था, 15 घंटे की मेहनत के बाद घर-घर सामान पहुंचाने के बदले उसे केवल ₹763 की कमाई होती थी, यानी लगभग ₹52 प्रति घंटे की औसत कमाई।
हाल ही में पंजाब के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने थपलियाल को अपने घर दोपहर के भोजन पर बुलाया और उसकी मेहनत, काम और कमाई पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने गिग इकॉनमी में काम करने वाले युवाओं की मुश्किलें उजागर कर दीं।
थपलियाल पिछले कुछ वर्षों से डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम कर रहा है। उसने बताया कि एक दिन में उसने 28 डिलीवरी पूरी की और इसके बदले उसे मात्र ₹763 ही मिले। लंबे काम के घंटे और कम वेतन गिग वर्कर्स की कठिनाईयों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
राघव चड्ढा पहले ही संसद में गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज के युवा लंबे समय तक काम करते हैं, लेकिन उन्हें इतनी कम कमाई मिलती है कि सम्मानजनक जीवन जीना मुश्किल हो जाता है। तेज़ व्यापार और ऐप आधारित कंपनियां 10 मिनट में डिलीवरी पर दबाव डालती हैं, लेकिन डिलीवरी पार्टनर को उसका उचित हिस्सा नहीं मिलता।
यह घटना केवल एक डिलीवरी पार्टनर की नहीं, बल्कि देशभर के लाखों गिग वर्कर्स की कहानी है। सवाल यह उठता है कि हाई-स्पीड सेवाओं की कीमत कौन चुका रहा है और क्या अब गिग वर्कर्स की मेहनत का सही मूल्य तय करने का समय नहीं आ गया है।











