11 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: यमन में पिछले कुछ समय से घटती हिंसा के बीच अचानक हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समर्थित अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने दक्षिणी यमन के सबसे महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों—हदरामौत और महरा—के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी पेट्रोमसीला भी उनके नियंत्रण में चली गई। इस कदम ने देश में बनी हालिया शांति को झकझोर दिया है।
कैसे बढ़ी तनाव की स्थिति?
एसटीसी की कार्रवाई ठीक उस समय हुई, जब सऊदी समर्थित कबीलों ने तेल राजस्व में हिस्सेदारी की मांग करते हुए इन क्षेत्रों पर अस्थायी कब्जा किया था। इसके बाद एसटीसी ने ताकत दिखाते हुए न केवल तेल प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण कर लिया, बल्कि महरा प्रांत में ओमान सीमा के पास स्थित अहम चेकपोस्ट भी अपने कब्जे में ले ली। अदन में संगठन ने राष्ट्रपति भवन पर भी नियंत्रण स्थापित किया, जहां सरकार का नेतृत्व बैठता था।
कौन है एसटीसी?
2017 में बना STC दक्षिणी यमन को अलग राष्ट्र बनाने की मांग करता है। संगठन को राजनीतिक और सैन्य समर्थन यूएई से मिलता है। इसके प्रमुख ऐदारूस अल-जुबैदी देश की राष्ट्रपति परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं, जिसके कारण इसकी राजनीतिक पकड़ काफी मजबूत है।
यमन का संकट शुरू कैसे हुआ?
2014 में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। 2015 में सऊदी अरब और यूएई सरकार का समर्थन करने के लिए युद्ध में शामिल हुए। उसी समय से यमन दो हिस्सों में बंट गया—उत्तर हूतियों के कब्जे में और दक्षिण सरकार समर्थक समूहों के हाथों में।
सऊदी अरब क्यों चिंतित?
सऊदी अरब ने एसटीसी के अचानक सैन्य विस्तार को चिंता की नजर से देखा है। हाल ही में सऊदी सेना ने अदन से अपने सैनिकों को वापस बुलाया था और अब वह स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहा है। सऊदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि “जबरन तथ्यों को बदलने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा फायदा यूएई को हो रहा है, जिससे यमन में उसका प्रभाव और मजबूत हो रहा है।













