11 महीने बाद दुनिया के सामने आईं मारिया कोरीना मचाडो: बेटी ने ओस्लो में लिया नोबेल पुरस्कार, वेनेजुएला में उठे सवाल

11 महीने बाद दुनिया के सामने आईं मारिया कोरीना मचाडो: बेटी ने ओस्लो में लिया नोबेल पुरस्कार, वेनेजुएला में उठे सवाल

11 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो करीब 11 महीनों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दीं। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में एक होटल की बालकनी पर उन्होंने समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया, जहां उनकी बेटी ने उनकी ओर से 2024 का नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकार किया। बाहर मौजूद लोग लगातार “फ्रीडम, फ्रीडम” के नारे लगाते दिखे।

क्यों थीं मचाडो छुपकर?

जनवरी 2024 में कराकास में हुए एक प्रदर्शन के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके बाद बढ़ते राजनीतिक दबाव और जान को खतरे के कारण वह नजरों से दूर रह रही थीं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि वे खुद समारोह में शामिल हो पाएंगी, लेकिन सुरक्षा कारणों से समय पर नहीं पहुंच सकीं। मचाडो ने फोन पर बताया कि उनकी यात्रा संभव बनाने के लिए कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डाली।

उनकी बेटी एना कोरीना सोसा ने पुरस्कार स्वीकार करते समय कहा कि उनकी मां एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक वेनेजुएला का सपना देखती हैं और संघर्ष जारी रखेंगी।

चुनाव में क्यों नहीं उतर पाईं?

पिछले साल मचाडो ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को चुनौती देने की तैयारी की थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। इसके बाद उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज का समर्थन किया, जिन्हें बाद में गिरफ्तारी वारंट के चलते स्पेन में शरण लेनी पड़ी।

वेनेजुएला में मिली-जुली प्रतिक्रिया

मचाडो के विदेश जाने पर देश में प्रतिक्रियाएं विभाजित दिखाई दीं।

  • जोसफिना पाज, कराकास की एक कर्मचारी, ने कहा कि उन्होंने लोकतंत्र के लिए बहुत त्याग किए हैं और अब अपने परिवार के साथ रहकर बाहर से संघर्ष जारी रख सकती हैं।

  • वहीं दुकानदार जोसे हर्टाडो ने उन्हें “देश छोड़ने” और “अमेरिका की ट्रंप नीति का समर्थन करने” पर आलोचना करते हुए देशद्रोही करार दिया।

नोबेल समिति और विश्व नेताओं की मौजूदगी

नोबेल समिति के प्रमुख ने कहा कि मचाडो बेहद खतरनाक परिस्थितियों में भी ओस्लो पहुंचने की कोशिश करती रहीं और अब सुरक्षित हैं। समारोह में अर्जेंटीना, इक्वाडोर, पनामा और पराग्वे के राष्ट्रपति भी मौजूद रहे। समिति ने मचाडो को “असाधारण साहस की प्रतीक” बताया और कहा कि वेनेजुएला एक “क्रूर निरंकुश शासन” में बदल चुका है।

बेटी ने पढ़कर सुनाया संदेश

मचाडो का संदेश उनकी बेटी ने पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे वेनेजुएला के लोगों का है। उन्होंने जल्द अपने देश और परिवार से मिलने की इच्छा जताई और कहा कि “लोकतंत्र पाने के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई कभी नहीं रुकनी चाहिए।” नोबेल समिति ने मादुरो सरकार से जनता के फैसले का सम्मान करने और सत्ता छोड़ने की अपील भी की।