10 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: देश में नशे की समस्या अब बच्चों तक पहुंच चुकी है। एक हालिया स्कूल सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कई भारतीय शहरों में बच्चे बेहद कम उम्र में ही ड्रग्स और नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नशा शुरू करने की औसत उम्र 12.9 साल पाई गई, जबकि कुछ बच्चे महज 11 साल की उम्र में ही इसकी चपेट में आ चुके हैं।
नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित इस अध्ययन में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, हैदराबाद, लखनऊ, इंफाल, जम्मू, डिब्रूगढ़ और रांची के करीब 5,920 स्कूली छात्रों को शामिल किया गया, जिनकी औसत उम्र 14.7 साल थी। सर्वे में सामने आया कि हर सात में से एक छात्र ने जीवन में कभी न कभी किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया है।
आंकड़ों के अनुसार, 15.1% छात्रों ने कभी नशा करने की बात स्वीकार की, जबकि 10.3% ने पिछले एक साल और 7.2% ने पिछले एक महीने में नशीले पदार्थ लेने की जानकारी दी। तंबाकू और शराब के बाद ओपिओइड, भांग और इनहेलेंट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पाया गया। इनमें बड़ी संख्या में ओपिओइड बिना डॉक्टर की पर्ची वाली दवाओं के रूप में लिए जा रहे थे।
यह मल्टी-सिटी स्टडी दिल्ली स्थित AIIMS के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की प्रमुख डॉ. अंजू धवन के नेतृत्व में की गई। रिसर्च में यह भी सामने आया कि कक्षा 11-12 के छात्रों में नशे की संभावना कक्षा 8 के छात्रों की तुलना में लगभग दोगुनी है। लड़कों में तंबाकू और भांग का इस्तेमाल ज्यादा पाया गया, जबकि लड़कियों में इनहेलेंट और फार्मास्युटिकल ओपिओइड का सेवन अधिक देखा गया।
चिंताजनक बात यह भी है कि आधे से ज्यादा छात्रों ने माना कि वे नशे से जुड़ी जानकारी छिपा सकते हैं, जिससे वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। अध्ययन में नशे और मानसिक परेशानियों के बीच भी संबंध पाया गया। पिछले साल ड्रग्स लेने वाले 31% छात्र मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझ रहे थे, जबकि नशा न करने वाले छात्रों में यह आंकड़ा 25% रहा।













