मान सरकार एक्शन में: 328 पावन स्वरूपों की गुमशुदगी मामले में 9 साल बाद पहली FIR दर्ज

मान सरकार एक्शन में: 328 पावन स्वरूपों की गुमशुदगी मामले में 9 साल बाद पहली FIR दर्ज

09 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Punjab Desk:  पंजाब की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था को झकझोर देने वाला नौ साल पुराना मामला आखिरकार फिर से सुर्खियों में है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों की रहस्यमयी गुमशुदगी के मामले में, मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने पहली बार सख्त कदम उठाते हुए 16 एसजीपीसी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह वह मुद्दा था, जो 2016 से लेकर आज तक तीन-तीन सरकारों के दौर में फाइलों में दबा रहा।

मामला क्या था?
2016 में एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग से जुड़े दस्तावेज़ों की जांच में खुलासा हुआ कि 267 पावन स्वरूप बिना रिकॉर्ड के विभाग से जारी हुए। बाद में अकाल तख्त की विशेष जांच समिति ने 2020 में संख्या बढ़ाकर 328 कर दी।
इनमें से 186 स्वरूप बिना अनुमति के वितरित हुए, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से गंभीर चूक थी, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर गहरी अनियमितता का संकेत भी था।
तीन सरकारें, शून्य कार्रवाई

1. बादल सरकार (2016–2017)
मामला सामने आया, लेकिन कोई FIR नहीं।
एसजीपीसी पर आरोप लगा कि जांच को दबाया गया।

2. कैप्टन अमरिंदर सरकार (2017–2021)
सिख संगठनों के प्रदर्शन और मांगों के बावजूद, केवल समितियों का गठन हुआ लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं।

3. चन्नी सरकार (2021–2022)
कम समय और अस्थिर राजनीतिक माहौल के कारण यह मुद्दा फिर से ठंडे बस्ते में चला गया।
तीनों सरकारों की निष्क्रियता ने सिख समुदाय और पंजाब की जनता के मन में गहरी निराशा भरी।
मान सरकार का बड़ा फैसला: पहली FIR दर्ज

AAP सरकार के आने के बाद, सिख संगठनों ने दोबारा मांग उठाई। मान सरकार ने पुरानी फाइलों से लेकर जांच रिपोर्टों तक सभी दस्तावेज़ों की नए सिरे से समीक्षा की।
सवा तीन साल की प्रक्रिया के बाद,➡️ पहली बार FIR दर्ज की गई
➡️ 16 एसजीपीसी कर्मचारियों को नामजद किया गया
➡️ आरोप: रिकॉर्ड से बाहर स्वरूपों का वितरण, दस्तावेज़ों में छेड़छाड़, अनधिकृत जारी करना।

यह कदम सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
अब जांच किस दिशा में जा सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल 16 कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा।
पूछताछ में सामने आ सकता है कि—

कौन-से अधिकारी वितरण में शामिल थे?
क्या वरिष्ठ पदाधिकारी या राजनीतिक चेहरे इसमें जुड़े थे?
क्या किसी प्रकार का धन लेन-देन या दबाव शामिल था?
यदि सबूत मिले तो जांच एसजीपीसी के उच्च पदाधिकारियों, पूर्व नेताओं और 2016–17 के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों तक भी पहुंच सकती है।
जनता और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया

मान सरकार के इस कदम का सिख संगठनों ने स्वागत किया है।
एक प्रवक्ता ने कहा—
“साढ़े नौ साल बाद न्याय की दिशा में पहला कदम… यह ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है।”

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तीन सरकारों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और कहा—
“तीन मुख्यमंत्री बदले, कोई FIR नहीं… भगवंत मान ने कर दिखाया।”
मान सरकार की प्रतिबद्धता: धर्म और पारदर्शिता सर्वोपरि

सीएम भगवंत मान ने कहा—
“धार्मिक आस्था से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच निष्पक्ष होगी और दोषी कोई भी हो, सजा जरूर मिलेगी।”
सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक या संस्थागत दबाव से मुक्त है।

निष्कर्ष: एक नई शुरुआत, एक मजबूत संदेश
नौ साल तक दबा रहने वाला यह संवेदनशील मामला अब कानूनी दायरे में है। FIR दर्ज होना सिर्फ पहला कदम नहीं, बल्कि पंजाब सरकार की ईमानदारी और धर्म-आस्था के प्रति सम्मान का भी मजबूत संदेश है।
आने वाले दिनों में जांच यह तय करेगी कि जिम्मेदार कौन था, लेकिन इतना स्पष्ट है कि मान सरकार ने वह किया, जो 3 सरकारें नहीं कर सकीं।